#संपादकीय

कही-सुनी (19 APRIL-26) : पांच सौ रुपए की साड़ी में खेल,महिला एवं बाल विकास विभाग सुर्ख़ियों में

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रवि भोई की कलम से

छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के लिए साड़ी खरीदी को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग सुर्ख़ियों में है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रति नग 500 रुपए की दर से 1,94,590 साड़ियां छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खरीदी। बताते हैं साड़ियों की सप्लाई सरगुजा संभाग के सप्लायरों ने की। साड़ियां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के हाथ लगते ही शिकायतों का अंबार लग गया। रंग छूटने से लेकर लंबाई भी कम बताई जाने लगी। बताते हैं पिछले साल की साड़ियों में शिकायत आने के बाद 2025-26 के लिए खरीदी गई साड़ियों का वितरण रोक दिया गया है। 2025-26 के लिए भी छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से साड़ियां खरीदी गई हैं। यह साड़ियां आईसीडीएस योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को दिया जाता है। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को दो साड़ी दी जाती है। इसके लिए 60 फीसदी राशि भारत सरकार देती है और 40 फीसदी राज्य को वहन करना होता है।इसी साड़ी को हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ न्यूनतम 718 रुपये से कम पर देने को तैयार नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड भी 588 रुपये न्यूनतम मूल्य रखा था, पर बजट का हवाला देकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने 500 में ही साड़ी खरीदी। खरीदी के समय ही रंग छूटने की संभावना व्यक्त कर दी गई थी। आदेश में साफ़-साफ़ लिख दिया गया था, फिर भी खरीदी गई। चर्चा है कि 500 रुपए की साड़ी में भी कमीशन का बंदरबांट हुआ, जिसके चलते साड़ी की साइज भी छोटी हो गई। कहते हैं एक आईएएस और महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अफसर की मिलीभगत से सारा खेल हो गया। शिकायत आने पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी जाँच करवाई और अब छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड भी जाँच करवा रहा है। खादी बोर्ड ने कुछ अफसरों की टीम बनाई है। वे शिकायत वाले जिलों में जाएंगे। अब जाँच में विभाग और बोर्ड पानी में लाठी पटक ले, जो किरकिरी होना था, वह तो हो गया। अब बड़ा सवाल है कि इस साल खरीदी गई 1,94,590 साड़ियों का क्या होगा और विभाग और बोर्ड प्रतिष्ठा कैसे बचाएंगे ?

उद्योग और श्रम मंत्री सवालों के घेरे में

छत्तीसगढ़ के सक्ती में वेदांता के पावर प्लांट में हुए गंभीर हादसे पर प्रबंधन सवालों के घेरे में है ही, राज्य के उद्योग और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन पर भी उंगुलियां उठनी शुरू हो गई है। बताते हैं मंत्री जी हादसे के दिन अपने विधानसभा कोरबा में थे और कार्यक्रमों में मशगूल थे। कोरबा से सक्ती कोई ज्यादा दूर नहीं है, मंत्री जी चाहते, तो कोरबा से रायपुर आते घायलों से मुलाक़ात कर उनके आंसू पोछ सकते थे। मंत्री जी हादसे के दो दिन बाद घायलों से मिले और घटना स्थल पर पहुंचे। मंत्री जी से पहले तो कांग्रेस का दल अस्पताल और घटनास्थल पर पहुँच गया। मंत्री जी का 12 अप्रैल को जन्मदिन था। खबर है कि मंत्री जी ने अपना जन्मदिन अपने विधानसभा क्षेत्र में ही मनाया। लोग कह रहे हैं शायद जन्मदिन की खुमारी उतरी नहीं थी, इस कारण मंत्री हादसे की तहकीकात करने के बजाय कैबिनेट की बैठक के लिए रायपुर आ गए। इस हादसे में अब तक 22 श्रमिक मारे जा चुके हैं। घटना पवार प्लांट में हुआ और श्रमिक हताहत हुए। इस कारण हादसा तो उद्योग और श्रम विभाग से ताल्लुक रखता है। गंभीर हादसे में मंत्री जी का रुख चर्चा में है।

दिल्ली के भाजपा नेता का सरकार में दखल

कहते हैं दिल्ली के एक भाजपा नेता का सरकार में दखल आजकल चर्चा का विषय है। सुनते हैं कि नेताजी मंत्रियों और अफसरों को सीधे निर्देश देने से भी परहेज नहीं करते। बताते हैं कि नेताजी अफसरों की पोस्टिंग में भी दिलचस्पी दिखाते हैं। किसी समय छत्तीसगढ़ से उनका नाता रहा है,उसका फायदा अब उठाने लगे हैं। नेताजी की दिल्ली में कोई ख़ास पूछपरख नहीं है, ऐसे में छत्तीसगढ़ उनके लिए टारगेट हो गया है। नेताजी के फरमान से मंत्री-अफसर कुलबुलाने तो लगे हैं, पर मजबूरी में ही सही कुछ निर्देश का पालन तो करना ही पड़ रहा है। अब देखते हैं नेताजी की नजर छत्तीसगढ़ पर कब तक रहती है।

क्या बिजली बोर्ड का निजीकरण होगा ?

बताते हैं आजकल छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल की सेहत अच्छी नहीं है। कहते हैं बोर्ड की तीनों कंपनियां मुनाफे में नहीं चल रही है। इस कारण इन दिनों छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के निजीकरण की हवा उड़ी हुई है। अब आने वाले दिनों में ही सच्चाई सामने आएगी। अभी बोर्ड को आईएएस सुबोध सिंह और रोहित यादव चला रहे हैं। बोर्ड की दो कंपनियों जेनरेशन और ट्रांसमिशन में संविदा वाले प्रबंध संचालक हैं। एक प्रबंध संचालक को तीसरी-चौथी बार एक्शटेंशन मिल चुका है। कहते हैं कि बिजली बोर्ड की कंपनियों की आर्थिक दशा को लेकर केंद्र सरकार भी सख्त है, तो उधर पर्यावरण मंडल और जिला प्रशासन की भी टेढ़ी नजर बताई जाती है। पिछले दिनों बिजली बोर्ड के पावर प्लांट कोरबा वेस्ट को करोड़ों रुपए के जुर्माने का नोटिस मिल गया। राखड़ बांध फटने के कारण हसदेव का पानी गंदा होने और पर्यावरण को नुकसान होने के कारण जिला प्रशासन सख्त हुआ है।

महिला आईएएस के तेवर

कहते हैं कि एक महिला आईएएस अफसर मंत्री का फोन भी बमुश्किल उठातीं हैं। फाइल भी रोक देती हैं और मर्जी होता है तो दस्तखत करती हैं। अब मंत्री बेबस हैं। साय सरकार में कई मंत्री नए हैं। पहली बार मंत्री बनने के साथ-साथ पहली बार विधायक बने हैं। चर्चा है कि महिला अफसर फाइलों पर दस्तखत से पहले अपने कुछ खास लोगों से मशविरा करती हैं। चर्चा है कि मंत्री को अपने विभागीय अफसर से काम लेने में नानी याद आ रही है। विभाग में काम न होने और अच्छा न होने पर मंत्री को खरी-खोटी भी सुनना पड़ रहा है, सो अलग।

अनिल अग्रवाल पर एफआईआर के मायने क्या ?

सक्ती में वेदांता के पवार प्लांट में हादसे के बाद पुलिस ने वेदांता के कर्मचारियों के साथ उसके मालिक अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। अब चर्चा चल पड़ी है कि यह एफआईआर दिखावा है या उसके आधार पर कोई कार्रवाई होगी। अनिल अग्रवाल के ही प्लांट बालको में कुछ साल पहले चिमनी गिरी थी और कई जानें चली गई थीं। कहते हैं घटना के एक दिन पहले वेदांता के टॉप मैनेजमेंट के लोग कोरबा आए थे, वे सक्ती भी आने वाले थे। पर हादसा होने के कारण नहीं आए। कांग्रेस आरोप लगा रही है कि सक्ती प्लांट में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल हुआ। चिमनी हादसे में भी यही आरोप लगे थे।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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