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कबीरधाम धान घोटाला: 1.06 करोड़ की हेराफेरी, तीन उपार्जन केंद्रों से हजारों क्विंटल धान गायब

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रायपुर/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। भौतिक सत्यापन के बाद तीन उपार्जन केंद्रों—बघर्रा, बाघामुड़ा और रमतला—में बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में कुल 4471.98 क्विंटल धान का हिसाब गड़बड़ पाया गया, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य के आधार पर करीब 1.06 करोड़ रुपए आंकी गई है।

जांच रिपोर्ट से साफ संकेत मिलते हैं कि यह मामला सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध है। तीनों केंद्रों में एक ही पैटर्न सामने आया—ऑनलाइन रिकॉर्ड में धान खरीदी दर्ज और भुगतान भी जारी, लेकिन गोदामों में उतनी मात्रा में धान मौजूद नहीं मिला। इससे फर्जी खरीदी और रिकॉर्ड में हेराफेरी की पुष्टि होती है।

बघर्रा केंद्र में फर्जी खरीदी
बघर्रा उपार्जन केंद्र में 1251.18 क्विंटल धान केवल कागजों में खरीदा दिखाया गया। मौके पर इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं मिला। जांच में ऑनलाइन एंट्री और स्टॉक रजिस्टर के बीच भारी अंतर सामने आया, जिससे करीब 29.64 लाख रुपए के फर्जी भुगतान की आशंका जताई गई है।

बाघामुड़ा में सबसे बड़ा घोटाला
बाघामुड़ा केंद्र में 1929.20 क्विंटल धान की कमी पाई गई, जिसकी कीमत लगभग 45.70 लाख रुपए है। यहां रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिला, जिससे स्पष्ट होता है कि नियमों को दरकिनार कर सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी की गई।

रमतला में भी दोहराया गया पैटर्न
रमतला केंद्र में 1291.60 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी कीमत करीब 30.60 लाख रुपए है। जांच में सामने आया कि पुराने स्टॉक को नया दिखाने और नए स्टॉक को छिपाने जैसे तरीके अपनाए गए, जो लंबे समय से चल रही गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।

किसानों के साथ सीधा अन्याय
धान खरीदी प्रणाली का मकसद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है, लेकिन इस घोटाले से स्पष्ट है कि व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ता है, जिन्हें भुगतान में देरी और खरीदी में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सख्त कार्रवाई के संकेत
संयुक्त जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में संबंधित खरीदी प्रभारियों, समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। साथ ही गड़बड़ी की राशि की वसूली और दोषी केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने जिले के सभी 108 उपार्जन केंद्रों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका आरोप है कि कई केंद्रों में इसी तरह के बड़े घोटाले की आशंका है और राइस मिलर्स व अधिकारियों की मिलीभगत से धान का ‘रिसायकल’ कर व्यापक भ्रष्टाचार किया गया है।

फिलहाल इस मामले की सुनवाई कलेक्टर न्यायालय में जारी है, और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।