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चुनाव आयोग की सख्ती: सोशल मीडिया पर भ्रामक और AI-जनित सामग्री के खिलाफ 3 घंटे में कार्रवाई के निर्देश

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रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जिम्मेदार उपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, आईटी नियम 2021 और आदर्श आचार संहिता का पालन सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और संबंधित हितधारकों के लिए अनिवार्य होगा।

आयोग ने निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी भ्रामक, अवैध या एआई-जनित (AI-generated) सामग्री की शिकायत मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

साथ ही, चुनाव प्रचार में उपयोग होने वाली किसी भी सिंथेटिक या एआई-आधारित सामग्री को स्पष्ट रूप से “एआई-जनित”, “डिजिटल रूप से संवर्धित” या “सिंथेटिक सामग्री” के रूप में लेबल करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, सामग्री के मूल स्रोत का खुलासा भी जरूरी होगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे और मतदाताओं का भरोसा कायम रहे।

आयोग ने बताया कि असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, भ्रामक सूचनाओं और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली पोस्ट्स पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

15 मार्च 2026 से अब तक ऐसे 11 हजार से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल की पहचान कर उन पर कार्रवाई की गई है, जिनमें हटाने की कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करना और स्पष्टीकरण जारी करना शामिल है।

इसके अलावा, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के तहत मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार के चुनावी प्रचार पर प्रतिबंध को भी दोहराया गया है। यह नियम टीवी, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया सभी पर लागू होगा।

आयोग ने यह भी बताया कि नागरिक, राजनीतिक दल और उम्मीदवार cVIGIL ऐप के माध्यम से आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच 3 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 96 प्रतिशत शिकायतों का समाधान निर्धारित 100 मिनट के भीतर कर दिया गया।