#संपादकीय

कही-सुनी (26 APRIL-26) : लोगों की नींद हराम कर दी है ई-चालान ने

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रवि भोई की कलम से

कहते हैं लोगों के सिर पर ई-चालान भूत की तरह मंडराने लगा है। ई-चालान लोगों को सोने भी नहीं दे रहा है। पता नहीं कब, कहाँ ट्रैफिक नियम तोड़ने के आरोप में मोबाइल पर ई-चालान का मैसेज आ जाय। अब तो यह भी भय सताने लगा कि ई-चालान नहीं पटाया तो सिपाही घर आकर गाड़ी जब्त न कर लें। ई-चालान पटाते-पटाते कुछ लोग साइबर ठगी के शिकार हो जा रहे, यह अलग। पुलिस ट्रैफिक रूल का पालन नहीं करने के कारण लोगों को सीधे दंड तो दे रही है,पर अपनी कमी या खामी को देख नहीं रही है। कई सिग्नल्स पर जेब्रा क्रासिंग मिट गए हैं। स्टाप लाइन का अता-पता नहीं। सड़कों पर स्पीड लिमिट के बोर्ड नजर नहीं आ रहे हैं, फिर भी लोगों को दंड मिल रहा है। सिद्धांत की बात तो यह है कि पहले हम सुधरे, फिर जग को सुधारने चले। सड़क में पार्किग की व्यवस्था दुरुस्त हो। पार्किंग की जगह ठेले-खोमचे नजर आ जाते हैं। कई बैंक और संस्थान, यहां तक कि छोटे शॉपिंग सेंटर में वाहन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम और पुलिस को उस तरफ भी नजरें दौड़ानी चाहिए। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और दुर्घटनाएं रोकने के लिए पुलिस को लोगों को भरोसे में लेना होगा। लोगों को ट्रैफिक रूल्स की जानकारी देने जगह-जगह कैम्प लगाने होंगे ,लोग जागरूक होंगे, तो नियम का पालन करेंगे। ई-चालान टेरर से लोग भयभीत होने के साथ गुस्से में भी हैं। परिवहन संघ ने तो ई -चालान के खिलाफ विरोध दर्ज करा ही दिया है।

वन बल प्रमुख की दौड़ में पांडे और यादव

कहते हैं कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख की दौड़ में 1994 बैच के आईएफएस अरुण पांडे और 1995 बैच के आईएफएस ओमप्रकाश यादव आगे चल रहे हैं। कुछ समय पहले वन बल प्रमुख के लिए 1992 बैच के आईएफएस कौशलेन्द्र कुमार का नाम भी चर्चा में था। अभी अरुण पांडे वन्यप्राणी संरक्षण के मुखिया हैं ,जबकि ओपी यादव कैम्पा का काम देखते हैं। माना जा रहा है कि 29 मई के बाद राज्य को नया वन बल प्रमुख मिल जाएगा। वर्तमान वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव मई में रिटायर हो जाएंगे। पहले हल्ला था कि राव साहब को एक साल का एक्सटेंशन मिल सकता है। कांग्रेस राज में श्रीनिवास राव को कई अफसरों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर वन बल प्रमुख बनाया गया था और मामला कोर्ट तक गया था। इस कारण श्रीनिवास राव के एक्सटेंशन की संभावना कम बताई जा रही है। श्रीनिवास राव के अलावा जून में तपेश कुमार झा और जुलाई में अनिल साहू भी रिटायर होने वाले हैं। इनके अलावा दो सीसीएफ भी अगले कुछ महीने में रिटायर होने वाले हैं। कहा जा रहा है वन विभाग में मई के बाद बड़े फेरबदल होंगे।

अफसरों की कर्मठता

कहते हैं पठन-पाठन वाले विभाग में अफसरों की कर्मठता चर्चा में है। वैसे तो सरकारी कामकाज का समय सुबह 10 बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक रहता है। लेकिन इस विभाग के अफसर और कर्मचारी रात को भी काम करने से परहेज नहीं करते हैं, खासतौर से टेंडर के मामले में। चर्चा है कि विभाग के अफसरों ने एक टेंडर आधी रात खोल लिया। टेंडर फर्नीचर सप्लाई से जुड़ा बताया जा रहा है। अब आजकल ऑनलाइन है। सबकुछ पर कइयों की निगाहें लगी रहती है। ऐसे लोगों ने कुछ जानकारियां भी निकाल ली और विभाग की पोल-पट्टी खोलनी शुरू कर दी है। अब देखिये क्या होता है।

मंत्री के ओएसडी का कारनामा

कहते हैं एक मंत्री के ओएसडी अपने एक रिश्तेदार को अपने विभाग से जुड़े संस्थान में बैक डोर इंट्री कराना चाहते थे। मामला फिट बैठ भी गया था, पर कुछ लोगों की निगाह पड़ गई और दाना-पानी लेकर इंट्री के खिलाफ पड़ गए। इसके बाद ओएसडी का अभियान सफल नहीं हो पाया। ओएसडी के पास दोहरा चार्ज है। मंत्री के दफ्तर में कुछ समय गुजारने के बाद वे एक बड़े संस्थान के मुखिया की भूमिका भी निभाते हैं। अब मंत्री जी और संस्थान के कर्ताधर्ता की मेहरबानी हो तो फिर ओएसडी साहब के पर लगेंगे ही और जो चाहे मनमर्जी करेंगे।

चर्चा में जिम

राजधानी रायपुर में आजकल एक जिम चर्चा में है। इस जिम याने व्यायामशाला में नामी-गिरामी लोग जाते हैं। नेता-अफसर सभी। यह जिम स्टेटस सिम्बल भी बन गया है। इस जिम में जाते वक्त एक महिला अफसर लिफ्ट में फंस गईं, तब से यह जिम सुर्ख़ियों में है। इसके पहले भी कई लोग लिफ्ट में फंस चुके हैं, पर इस जिम में एक रिटायर आईएएस की हिस्सेदारी से सबके मुँह सिल गए। रिटायर आईएएस को जमीन किंग भी कहा जाता है। ये पद में रहते एक क्लब में हिस्सेदार हो गए थे। जब क्लब में बवाल हुआ, तब मामला सामने आया। अबकी बार लिफ्ट कांड होने के बाद सारी चीजें उजागर होनी शुरू हुई है।

बादाम कांड से हाउसिंग बोर्ड की साख पर बट्टा

बिलासपुर में हाउसिंग बोर्ड के एक दफ्तर में पिछले दिनों घटित बादाम कांड से संस्थान की साख पर बट्टा लग गया है। हाउसिंग बोर्ड ने पिछले दो-ढाई साल में अपनी साख सुधारी थी और वित्तीय स्थिति भी। एक घटना ने हाउसिंग बोर्ड की ढ़ाई साल की कमाई पर पानी फेर दिया। हाउसिंग बोर्ड एक कामर्शियल संस्था है और उपभोक्ता उसकी रीढ़ है। प्राइवेट बिल्डरों से मुकाबले के लिए उसे अपने उपभोक्ताओं के साथ सदव्यवहार की नीति अपनानी होगी। बाबू राज या लालफीताशाही चलेगी तो फिर हाउसिंग बोर्ड गड्डे में चला जाएगा। हाउसिंग बोर्ड को बिजनेस करना है तो अपने कर्मचारियों-अधिकारियों को कारपोरेट कल्चर में ढालना होगा।

कब होगा प्रशासनिक फेरबदल

उम्मीद की जा रही है कि राज्य में प्रशासनिक फेरबदल विधानसभा के विशेष सत्र के तत्काल बाद या मई के पहले हफ्ते में हो जाएगा। राज्य के कई आईएएस अफसर पश्चिम बंगाल में चुनाव कराने गए हैं। 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के बाद उनके लौट आने की संभावना है। चर्चा है कि पश्चिम बंगाल की रिपोर्ट भी अफसरों की पोस्टिंग में बड़ा मायने रखेगी। प्रशासनिक फेरबदल में इस बार जिलों से ज्यादा मंत्रालय और एचओडी दफ्तर प्रभावित होंगे।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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