‘मन की बात’ में गूंजा अबूझमाड़, वन मंत्री केदार कश्यप बोले— लाल आतंक से विकास की पहचान बना क्षेत्र

नारायणपुर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण चर्चा में रहने वाला अबूझमाड़ अब विकास, जनविश्वास और जनजातीय गौरव की नई पहचान बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 134वें संस्करण में अबूझमाड़ की झलक राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने के बाद क्षेत्र में उत्साह और गर्व का माहौल है।
‘मन की बात’ में दिखी बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर
नारायणपुर जिले के ईरकभट्टी क्षेत्र में आयोजित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम सुना। राष्ट्रीय प्रसारण में अबूझमाड़ की मौजूदगी को उन्होंने बस्तर और पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
‘लाल आतंक से विकास के मॉडल तक का सफर’
वन मंत्री ने कहा कि एक समय था जब अबूझमाड़ की पहचान केवल नक्सल हिंसा, भय और पिछड़ेपन से होती थी, लेकिन आज यह क्षेत्र विकास और जनकल्याण की नई कहानी लिख रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं और विकासोन्मुखी सोच का असर अब दूरस्थ वनांचलों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
जनजातीय समाज को मिला सम्मान और पहचान
केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान मिला है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंची है। आज बस्तर अपनी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और विकास कार्यों के लिए पहचाना जा रहा है।
राष्ट्रीय मंच पर मिली सकारात्मक पहचान
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ में अबूझमाड़ की तस्वीर दिखना केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित रहे क्षेत्र के बदलाव का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे विकास एवं राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय , छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष Roopsay Salam, प्रदेश महामंत्री Akhilesh Soni सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।
वन मंत्री ने कहा कि अबूझमाड़ का बदलता स्वरूप इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा, विकास और जनविश्वास के समन्वय से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी परिवर्तन की नई मिसाल बन सकते हैं।





