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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.6% किया

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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की। आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने और ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखने का निर्णय लिया।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बीच बाजार की नजरें आरबीआई के फैसलों पर टिकी थीं।

रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश की घरेलू आर्थिक गतिविधियां फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखना उचित समझा गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखा रही है।

महंगाई और वैश्विक जोखिमों पर चिंता

गवर्नर ने कहा कि दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनावों का असर आर्थिक विकास और महंगाई पर पड़ रहा है। हालांकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई अभी लक्ष्य सीमा के भीतर है, लेकिन इसमें बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है, जबकि कोर महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

GDP ग्रोथ अनुमान घटाया

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और वैश्विक मांग में कमजोरी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

गवर्नर ने कहा कि ऊंची लॉजिस्टिक लागत और वैश्विक बाजारों में सुस्ती के कारण भारतीय निर्यात पर भी दबाव बढ़ सकता है।

विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी

आरबीआई ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कुछ अहम कदमों की भी घोषणा की है। सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश नियमों को आसान बनाया जाएगा। इसके अलावा अनिवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) के लिए इक्विटी निवेश की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त रूप से मजबूत है और किसी भी बाहरी झटके का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरबीआई आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाता रहेगा।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि भविष्य की मौद्रिक नीति के फैसले पूरी तरह आंकड़ों और बदलती आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित होंगे।