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अमेरिका-ईरान में शांति की बड़ी पहल, 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

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वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में करीब चार महीने से जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

इस संभावित समझौते को पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि समझौते पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो इससे क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव कम होने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

क्या है समझौते की मुख्य रूपरेखा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रस्तावित समझौते में सैन्य कार्रवाइयों को रोकने, समुद्री नाकाबंदी समाप्त करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने जैसे प्रावधान शामिल हैं। साथ ही अगले 60 दिनों तक आगे की वार्ताओं के जरिए लंबी अवधि के समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी पुष्टि की है कि समझौते के मसौदे पर सहमति बन चुकी है और हस्ताक्षर के बाद दोनों पक्ष आगे की बातचीत जारी रखेंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। पिछले महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। समझौते के बाद इसके दोबारा पूरी तरह खुलने की संभावना जताई जा रही है।

दुनिया भर से मिल रहा समर्थन

संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों और कई पश्चिम एशियाई देशों ने इस पहल का स्वागत किया है। अंतरराष्ट्रीय नेताओं का मानना है कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय शांति को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी स्थिरता प्रदान करेगा।

बाजारों पर भी दिखा असर

समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निवेशकों का भरोसा बढ़ने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी राहत का माहौल बना।

19 जून पर टिकी दुनिया की नजर

अब पूरी दुनिया की नजर 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हस्ताक्षर समारोह पर है। यदि यह समझौता औपचारिक रूप से लागू होता है, तो इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जा सकता है और पश्चिम एशिया में शांति की नई शुरुआत मानी जाएगी।