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डेल्टा प्लस वेरिएंट क्यों खतरनाक है, आखिर इसका फैलाव बहुत ज्यादा डराने वाला क्यों है?

देश में जानलेवा कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वेरिएंट ने सरकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक देश में डेल्टा प्लस वेरियंट के 40 केस हैं. ये 40 केस 8 राज्यों में पाए गए हैं. ये राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कर्नाटक हैं. केंद्र सरकार ने कहा है कि डेल्टा+ वेरिएंट ऑफ कंसर्न है. इसलिए राज्यों को सतर्क रहने की जरूरत है. जानिए ये वेरिएंट क्यों खतरनाक है, आखिर इसका फैलाव बहुत ज्यादा डराने वाला क्यों है?

पहले जानिए किस राज्य में कितने केस

  • महाराष्ट्र- 21
  • मध्य प्रदेश- 6
  • केरल- 3
  • तमिलनाडु- 3
  • कर्नाटक- 2
  • आंध्र प्रदेश- 1
  • पंजाब- 1
  • जम्मू- 1

तेजी से बढ़ रहा है डेल्टा वेरिएंट का प्रभाव डब्ल्यूएचओ

कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट विश्व में इस वायरस के अन्य स्वरूपों की तुलना में प्रबल होता जा रहा है, क्योंकि यह कहीं ज्यादा तेजी से संचारित होता है. कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट सबसे पहले भारत में सामने आया था. लेकिन अब यह करीब 80 देशों में पाया जा रहा है. बी.1.617.2 डेल्टा वेरिएंट का सबसे पहले भारत में अक्टूबर 2020 में पता चला था.

सबसे बड़ा खतरा है डेल्टा वेरिएंट- फाउची

वहीं, व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची ने आगाह किया है कि कोरोना का बेहद संक्रामक वेरिएंट ‘डेल्टा’ महामारी का सफाया करने के प्रयासों के लिए सबसे बड़ा खतरा है. अमेरिका में सामने आने वाले कोरोना वायरस के नए मामलों में से 20 फीसदी से अधिक में संक्रमण की वजह डेल्टा वेरिएंट है. उन्होंने कहा कि दो हफ्ते पहले तक नए मामलों में से दस फीसदी में यह वेरिएंट पाया गया था.

ब्रिटेन में हावी हुआ डेल्टा वेरिएंट

गौरतलब है कि ब्रिटेन में यह वेरिएंट (डेल्टा) हावी हो चुका है और यहां सबसे पहले सामने आए अल्फा वेरिएंट के मुकाबले अधिक फैल चुका है. यहां 90 फीसदी से अधिक नए मामलों की वजह डेल्टा वेरिएंट है और इसके प्रकोप के कारण ब्रिटेन में गतिविधियों की मंजूरी देने में भी विलंब किया जा रहा है. अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने डेल्टा को बेहद संक्रामक बताते हुए इसे ‘चिंताजनक वेरिएंट’ की श्रेणी में डाला है.

इस वेरिएंट का फैलाव बहुत ज्यादा डराने वाला क्यों है?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) ने सूचना दी थी कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, ‘वर्तमान में चिंताजनक वेरिएंट (वीओसी)’ है, जिसमें तेजी से प्रसार, फेफड़े की कोशिकाओं के रिसेप्टर से मजबूती से चिपकने और ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ प्रतिक्रिया में संभावित कमी जैसी विशेषताएं हैं.

हाल ही में किन देशों में मिला ये वेरिएंट?

कोरोना वायरस का ‘डेल्टा प्लस’ वेरिएंट भारत के अलावा-

  • अमेरिका
  • ब्रिटेन
  • पुर्तगाल
  • स्विट्जरलैंड
  • जापान
  • पोलैंड
  • नेपाल
  • चीन
  • और रूस में मिला है.

क्या इस वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी है कोविशील्ड और कोवैक्सीन?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि मोटे तौर पर  दोनों भारतीय टीके कोविशील्ड और कोवैक्सीन डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं, लेकिन वे किस हद तक और किस अनुपात में एंटीबॉडी बना पाते हैं, इसकी जानकारी बहुत जल्द साझा की जाएगी.

 

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