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छत्तीसगढ़ में ‘हीरों’ की नई उम्मीद : महासमुंद के बलौदा में होगी हैवी ड्रिलिंग, 5 प्राकृतिक हीरे मिलने के बाद बड़ा फैसला

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० व्यावसायिक डायमंड खदान विकसित करने की दिशा में बढ़ा अहम कदम

रायपुर। छत्तीसगढ़ की धरती में छिपे हीरों के खजाने की तलाश अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में प्राकृतिक हीरे मिलने के बाद अब एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) ने बड़े व्यास (Large Diameter) की ड्रिलिंग को मंजूरी दे दी है। इस हाईटेक ड्रिलिंग के जरिए वैज्ञानिक यह पता लगाएंगे कि जमीन के भीतर हीरे का भंडार कितना बड़ा है, उसकी गुणवत्ता क्या है और वह कितनी गहराई तक फैला हुआ है। यह फैसला छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक डायमंड खनन की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा की गई। बोर्ड ने निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य तय समयसीमा में पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग के आधार पर फीजिबिलिटी रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि यहां व्यावसायिक स्तर पर हीरा खदान विकसित की जा सकती है या नहीं।

बैठक में एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी, निदेशक आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार और विनय कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि एनएमडीसी (51%) और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49%) के संयुक्त उपक्रम एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से यहां किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण पन्ना स्थित डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले थे।

खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी शुरुआती दौर में इसी तरह के संकेत मिलने के बाद बड़े व्यावसायिक हीरा भंडार विकसित हुए थे। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश की सबसे संभावनाशील डायमंड परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यदि आगामी ड्रिलिंग के नतीजे सकारात्मक रहे तो छत्तीसगढ़ जल्द ही देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है।