Green Packaging पर रायपुर में कार्यशाला, MSMEs को पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग अपनाने के बताए तरीके

रायपुर। MSME इकाइयों में पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रैम्प (RAMP) योजना के अंतर्गत रायपुर में Green Packaging पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। उद्योग संचालनालय एवं छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CSIDC), रायपुर की पहल पर होटल एरिएना में आयोजित कार्यशाला में उद्यमियों को Green Packaging के विकल्प, लागत, उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर sourcing की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते बाजार और पर्यावरणीय जरूरतों को देखते हुए MSMEs के लिए ऐसी पैकेजिंग अपनाना जरूरी है, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ किफायती और आसानी से उपलब्ध भी हो।
Green Packaging की affordability और availability पर चर्चा
कार्यशाला के पहले सत्र में आनंद वर्धन ने Green Packaging, Affordability, Accessibility and Availability विषय पर जानकारी दी। उन्होंने MSMEs के लिए पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग को आसान और किफायती बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई। साथ ही वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्रियों के बारे में भी जानकारी साझा की।
दूसरे सत्र में Vandana Business Solution के सनी चंचलानी ने Green Packaging Material की उपलब्धता और Local Sourcing पर चर्चा की। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पैकेजिंग सामग्री और उसकी sourcing से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी।
भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पैकेजिंग अपनाने पर जोर
तीसरे सत्र में Sector Expert, Plastic नम्रता तिवारी ने Green Packaging के महत्व और MSMEs के लिए भविष्य की पैकेजिंग पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और बाजार की बदलती जरूरतों को देखते हुए MSMEs को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग विकल्पों की ओर बढ़ना होगा।
कार्यशाला में Sustainable Packaging, वैकल्पिक पैकेजिंग सामग्री, Local Sourcing और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच चर्चा हुई। उद्यमियों ने अपने व्यवसाय में Green Packaging अपनाने से जुड़ी जिज्ञासाएं भी साझा कीं।
रैम्प योजना- CSIDC के प्रतिनिधियों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य MSMEs को पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और राज्य में Green Packaging के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित करना है। कार्यशाला में MSME इकाइयों, उद्यमियों और संबंधित हितधारकों ने भाग लिया। तकनीकी सत्र एवं प्रश्नोत्तर के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।





