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कुछ ऐसे पूरा मिशन काबुल: सभी को एक जगह इकट्ठा करना थी सबसे बड़ी चुनौती, तीन घंटे में पूरा हुआ 20 मिनट का सफर

नई दिल्ली: काबुल में तालिबानी कब्जे और अफरातफरी के बीच भारत के दूतावास स्टाफ और आईटीबीपी जवानों की निकासी किसी मुश्किल ऑपरेशन से कम नहीं थी. भारत वापसी की आस में भारतीय राजदूत समेत वरिष्ठ अधिकारियों सुरक्षा स्टाफ और लोगों ने पूरी रात जागते हुए गुजारी.

सूत्र बताते हैं कि तालिबान लड़ाकू की नाकेबंदी के बीच भारतीय लोगों के दल को पहले सुरक्षित इकट्ठा करने की मशक्कत की गई.उसके बाद मैं सुरक्षित एयरपोर्ट पहुंचाने का काम हुआ. काबुल में सोमवार शाम पहुंचे भारतीय वायुसेना के C-17 विमान को यूं तो देर रात ही रवाना हो जाना था लेकिन तालिबानी पहरेदारी और शहर में जारी अफरा-तफरी के बीच लोगों की निकासी मिशन बीच में रोकना भी पड़ा. इसके चलते वायुसेना के विमान और पायलटों ने भी तनावपूर्ण हालात में काबुल एयरपोर्ट पर ही रात गुजारी.

इस बीच काबुल एयरपोर्ट को नियंत्रित कर रहे अमेरिका के अधिकारियों के साथ तालमेल से लेकर वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन से भारतीय विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की बातचीत एक आवाज नहीं चलती रही. साथ ही तालिबानी गुटों के साथ भी संपर्क कर यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय दल बिना किसी नुकसान के एयरपोर्ट पहुंच सके. इस दौरान सबसे मुश्किल काम था विभिन्न स्थानों से निकाल कर उन्हें एक स्थान पर पहुंचाना. बड़ी सावधानी के साथ उसे पूरा किया गया.

हालांकि मुश्किलों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज 20 मिनट के रास्ते को पार करने में 3 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा. बीच में कई बार वाहनों को तालिबानी लड़ाकों की नाकेबंदी अपने रोका भी. इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती और खतरा इस बात का था की कोई भी घटना पूरे ऑपरेशन के लिए खतरा बन सकता था. ऐसे में मिशन के लोगों और नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा आईटीबीपी के जवानों पर था जो मिशन की सुरक्षा में तैनात थे.

करीब आधी के बाद हरी झंडी मिलने के बाद ही वाहनों का काफिला मिशन से निकला और मुश्किल सफर कर एयरपोर्ट पहुँचा. जहाँ कुछ लोग पहले से मौजूद थे. एयरपोर्ट पर अफ़रातफ़री के बीच आपने लोगो को सुरक्षित रखना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. खासकर ऐसे में जबकि यह भी पता लगाना मुश्किल हो कि कोस भेस में कौन है. बाकायदा रिंग फेन्स कर लोगों को तब तक सुरक्षित रखा गया जब तक कि सुरक्षा जाँच पूरी नहीं हो जाती और लोग विमान में नहीं बैठ जाते.

सुबह करीब 7 बजे जब सभी लोग विमान में सवार हो गए तो दिल्ली में भी इस निकासी अभियान को कोऑर्डिनेट कर रहे लोगों ने राहत की सांस ली. करीब 7:30 बजे इस विमान ने भारतीय वायुसेना विमान ने उड़ान भरी. हालांकि चिंताएं तब तक बरकरार रहीं जब तक कि भारतीय विमान अफ़ग़ान वायुसीमा सीमा से बाहर नहीं आ गया.

 

 

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