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दुर्ग यूनिवर्सिटी के कुलसचिव को हाईकोर्ट से झटका, FIR रद्द करने की याचिका खारिज

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दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कुलसचिव पर पद का कथित दुरुपयोग करते हुए विश्वविद्यालय की दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से जबरन राशि वसूलने का आरोप है।

घर में काम करने वाली महिला को विश्वविद्यालय में नौकरी देने का आरोप

मामले के अनुसार, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के घर में खाना बनाने का काम करने वाली शुभांगी मराठे को करीब दो साल पहले विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया गया था। आरोप है कि महिला ने विश्वविद्यालय में नियमित रूप से काम नहीं किया।

शिकायत के मुताबिक, कुलसचिव के निर्देश पर शुभांगी केवल महीने के अंतिम दिन विश्वविद्यालय आती थी और उपस्थिति रजिस्टर में पूरे महीने की हाजिरी दर्ज कर देती थी।

वेतन का बड़ा हिस्सा दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का आरोप

महिला के खाते में वेतन आने के बाद कथित तौर पर उसे 2,200 रुपये अपने पास रखने और शेष करीब 9,000 रुपये कुलसचिव के पुत्र उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता था।

जून के अंत में जब शुभांगी विश्वविद्यालय में हस्ताक्षर करने पहुंची तो उसने पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी। उसने लिखित आवेदन देकर पूरा वेतन दिलाने के साथ विश्वविद्यालय में वास्तविक रूप से काम पर लगाए जाने की मांग की।

पासबुक और बैंक ट्रांजेक्शन भी किए पेश

शुभांगी ने शिकायत के साथ अपने पासबुक की छायाप्रति, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपे।

मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय की ओर से फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई। समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच की।

रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई FIR

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दुर्ग एसएसपी को रिपोर्ट सौंपते हुए कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके बाद 3 अगस्त को मोहन नगर थाने में कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ धारा 316(4) के तहत FIR दर्ज की गई।

इसके बाद कुलदीप ने FIR रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। साथ ही उन्होंने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन और उसकी रिपोर्ट को चुनौती देते हुए अलग रिट याचिका भी दायर की।

कई लोगों को बनाया गया प्रतिवादी

याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय के कुलपति, सहायक कुलसचिव, जांच समिति की समन्वयक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव समेत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे को प्रतिवादी बनाया गया था।हाईकोर्ट द्वारा FIR रद्द करने की याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले की आपराधिक जांच आगे जारी रहेगी।