भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाने के मायने क्या ?

रवि भोई
रायपुर। कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में विधानसभा चुनाव के करीब छह महीने पहले वहां के प्रभारी पद से छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और ए आई सी सी महासचिव भूपेश बघेल को हटा दिया। पार्टी ने भूपेश बघेल को असम का प्रभारी महासचिव बनाया है। असम में करीब साढ़े चार साल बाद चुनावी मौसम आएगा। चुनावी वाले राज्य से हटाकर गैर चुनावी वाले राज्य का इंचार्ज बनाए जाने को भूपेश बघेल के कद में गिरावट के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश के तबादले से छत्तीसगढ़ की राजनीति पर असर पड़ सकता है।
पंजाब की तरह असम में मारामारी फिलहाल नहीं रहेगी, ऐसे में माना जा रहा है कि भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की राजनीति में ज्यादा समय दे सकते हैं। पर छत्तीसगढ़ की राजनीति में अभी भूपेश बघेल अलग-थलग पड़े नजर आ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव की जुगलबंदी नजर आ रही है। भूपेश बघेल के ख़ास समर्थक कहे जाने वाले विधायक देवेंद्र यादव ने भी उनसे दूरी बनाकर अलग लाइन में चलने लगे हैं। दीपक बैज को भूपेश बघेल ने ही प्रदेश अध्यक्ष बनवाया था, पर वे भी अपनी लाइन बनाने में लगे हैं। दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर तीन साल हो गए हैं। हाईकमान नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति अगले कुछ में कर सकता है। प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में टी एस सिंहदेव हैं। सिंहदेव पिछले विधानसभा चुनाव हार गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का इंचार्ज बनाया है। सुखदेव भगत महासचिव नहीं हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें अस्थायी तौर से प्रभार दिया गया है। छत्तीसगढ़ में 2028 में चुनाव है। चुनाव के पहले किसी महासचिव को प्रभार दिया जा सकता है।
भूपेश बघेल को करीब पौने दो साल पहले पंजाब का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। भूपेश बघेल को पंजाब में कांग्रेस की अंदरूनी कलह को सुलझाने के लिए ‘ट्रबलशूटर’ के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुटों के बीच खींचतान और बढ़ गई। बैठकों में नारेबाजी और सार्वजनिक मंचों पर मतभेद खुलकर सामने आने के बाद आलाकमान को यह स्पष्ट संकेत गया कि बघेल गुटबाजी को नियंत्रित करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं । भूपेश बघेल पिछले कुछ समय से पंजाब कांग्रेस में सक्रिय थे और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कर संगठन को एकजुट करने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु समेत कई नेताओं ने इन बैठकों से दूरी बनाए रखी। चन्नी गुट ने दिल्ली में राहुल गांधी की टीम के सामने बघेल को हटाने की मांग भी रखी थी। भूपेश बघेल के लिए गो बैक के पोस्टर लगा दिए गए थे।
पंजाब में फ़रवरी 2027 में चुनाव होने की सम्भावना है। पंजाब में अभी आप की सरकार है। कांग्रेस वहां सत्ता में वापसी करना चाहती है। इसके लिए पंजाब के नेताओं में एकजुटता जरुरी है। हाईकमान ने अब पंजाब की जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपी है। सचिन पायलट पंजाब को ठीक कर देते हैं, तो दिल्ली में कद बढ़ने के साथ राजस्थान में भी उन्हें बड़ी जिम्मेदरी मिल सकती है। राजस्थान में 2028 में विधानसभा चुनाव है। राहुल गांधी के पंजाब दौरे से ठीक पहले कांग्रेस हाईकमान ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी है, ताकि चुनाव से पहले संगठन की कमियों को दूर कर एक नई शुरुआत की जा सके।
सचिन पायलट को पंजाब जैसी चुनौतीपूर्ण और कलह से जूझ रही स्टेट का जिम्मा सौंपना दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा बढ़ा है। पंजाब में युवाओं और असंतुष्टों को साधने के लिए आलाकमान ने एक ऐसे चेहरे को चुना है जिसकी स्वीकार्यता संगठन के अलग-अलग धड़ों में बेहतर मानी जाती है।




