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राज्यसभा चुनाव: सपा ने खोले पत्ते, रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी को बनाया उम्मीदवार, आज दाखिल करेंगे नामांकन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। सपा ने वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के साथ कॉरपोरेट और खेल जगत से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों प्रत्याशी बुधवार को करीब 11 बजे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कॉरपोरेट क्षेत्र के चर्चित नाम हैं। वे वर्तमान में कंपनी में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। वे उद्योगपति और राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के पुत्र हैं। नथवानी का जुड़ाव खेल प्रशासन से भी रहा है और गुजरात क्रिकेट से जुड़े दायित्वों में उनकी भूमिका रही है।

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण में भी रुचि

धनराज नथवानी ने लंदन के रीजेंट बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई की है। उन्हें पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और फोटोग्राफी में विशेष रुचि है। गुजरात के वन्यजीवों, खासकर गिर के शेरों के संरक्षण से जुड़े अभियानों में भी उनकी सक्रियता बताई जाती है।

तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर नजर

राज्यसभा चुनाव में सपा की रणनीति सिर्फ दो उम्मीदवारों तक सीमित रहेगी या पार्टी तीसरा प्रत्याशी भी उतारेगी, इस पर भी नजर बनी हुई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल है और तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी सियासी रणनीति पर मंथन की चर्चा है।

16 अक्टूबर को होगा मतदान

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। मतदान और मतगणना 16 अक्टूबर को होगी।

उत्तर प्रदेश की इन 10 सीटों में वर्तमान में आठ भाजपा, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं और चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत के जरिए होता है। ऐसे में चुनाव से पहले दलों का संख्या बल और विधायकों का समर्थन अहम माना जा रहा है।