गांधी जयंती पर जैतू साव मठ में बापू और शास्त्री जी को नमन, आजादी के आंदोलन से जुड़ी स्मृतियां हुईं ताजा

रायपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जैतू साव मठ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान महात्मा गांधी और शास्त्री जी को याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की गई और बापू के प्रिय भजनों का गायन किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि आजादी से पहले महात्मा गांधी का जैतू साव मठ आगमन हुआ था। ब्रिटिश शासन के दौर में यह मठ स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा, जहां आंदोलन से जुड़ी रणनीतियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाती थी।
राजेश्री महंत डॉ. रामसुंदर दास, पूर्व विधायक ने कहा कि महात्मा गांधी के मठ आगमन की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए यहां उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि गांधी जी के संघर्ष और विचारों ने देश की आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी।
ट्रस्ट के सचिव महेंद्र अग्रवाल और अजय तिवारी ने बताया कि महात्मा गांधी जब जैतू साव मठ पहुंचे थे, तब उन्होंने यहां स्थित कुएं का पानी एक दलित कन्या के हाथों पिया था। इसके माध्यम से उन्होंने सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता के खिलाफ संदेश दिया था। बताया गया कि वह ऐतिहासिक कुआं आज भी मठ परिसर में संरक्षित है।
कार्यक्रम के दौरान बापू के भजनों का गायन किया गया और महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके विचारों एवं योगदान को याद किया गया।
इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ. सुरेश शुक्ला, संदीप उपाध्याय, शिवम गोस्वामी, दीपक पाठक, उदय कुमार, गायत्री सिंह, बबली दत्ता, मिथुन मंडल, निशा फातिमा, लोमेश साहू, जाह्नवी डहरिया, तोषिमा डहरिया, विकास विश्वास, नीता धीवर, समीरा टंडन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





