Raipur Crime News: शोएब ढेबर तक पहुंची रेड की सूचना? क्राइम ब्रांच का आरक्षक लाइन अटैच, इंस्पेक्टर की भूमिका भी जांच के घेरे में

रायपुर। कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी शोएब ढेबर की दोबारा गिरफ्तारी की कोशिशों के बीच पुलिस विभाग में कार्रवाई हुई है। पुलिस की दबिश से जुड़ी गोपनीय जानकारी आरोपी तक पहुंचने की आशंका के बाद क्राइम ब्रांच के आरक्षक शिवम द्विवेदी को लाइन अटैच किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि छापेमारी की जानकारी शोएब ढेबर तक कैसे पहुंची और इसमें किस-किस की भूमिका रही।
रेड से पहले ही फरार हो गया शोएब?
शोएब ढेबर की दोबारा गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कई स्थानों पर कार्रवाई के बावजूद शोएब पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि कार्रवाई की जानकारी पहले ही आरोपी तक पहुंच गई थी।
इसी सिलसिले में आरक्षक शिवम द्विवेदी की भूमिका की जांच शुरू हुई और डीसीपी क्राइम की ओर से उसे तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच किया गया।
दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की रिपोर्ट
कुछ रिपोर्टों में इस मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध आदेशों के मुताबिक दोनों के खिलाफ कार्रवाई के कारणों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। एक आरक्षक को प्रशासनिक कारणों से रक्षित केंद्र भेजे जाने की बात कही गई है।
इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी भी जांच के दायरे में?
पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि रेड से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले में थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल किसी इंस्पेक्टर की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
25 करोड़ की रंगदारी मामले में शोएब की तलाश
यह पूरा मामला कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर कथित धमकी देकर 25 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने से जुड़ा है। पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर शोएब ढेबर को गिरफ्तार किया था। बाद में उसे अदालत से जमानत मिल गई। इसके बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तारी के लिए न्यायालय से अनुमति ली और उसकी तलाश शुरू की।
फिलहाल पुलिस की टीमें शोएब ढेबर के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसकी फरारी के दौरान उसे किसी स्तर पर मदद या कार्रवाई से संबंधित गोपनीय जानकारी तो नहीं दी गई।




