Gandhi Jayanti 2026: ग्रामोद्योग को मिली नई रफ्तार, ‘अमारी सिल्क’ लॉन्च से 360 महिलाओं को रोजगार; बुनकरों को 86.96 लाख की सौगात

रायपुर। गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ में ग्रामोद्योग, खादी, हाथकरघा और रेशम क्षेत्र से जुड़े कारीगरों और महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण पहल शुरू की गईं। खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के आयोजित कार्यक्रम में ‘अमारी सिल्क’ ब्रांड लॉन्च किया गया। इस पहल से 11 जिलों के 13 महिला स्व-सहायता समूहों की 360 महिलाओं को रोजगार मिलने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बुनकरों के लिए 86.96 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई, जबकि बस्तर संभाग में टसर कीट पालन और धागाकरण के क्षेत्र में 360 प्रशिक्षार्थियों का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया।
‘अमारी सिल्क’ की हुई लॉन्चिंग, 360 महिलाओं को रोजगार
रेशम प्रभाग की ओर से कोसा फलों से तितलियों के स्वतः बाहर निकलने के बाद तैयार होने वाले धागे को ‘अमारी सिल्क’ यानी अहिंसा सिल्क ब्रांड के नाम से लॉन्च किया गया। विभाग के अनुसार, इससे 11 जिलों के 13 महिला स्व-सहायता समूहों की 360 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
महिलाओं को टसर धागों का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘रेशम सेतु’ नामक विक्रय मंच भी तैयार किया जा रहा है। इससे 79 महिला समूहों को जोड़ने की योजना है।
बस्तर में 360 प्रशिक्षार्थियों का टसर प्रशिक्षण शुरू
बस्तर संभाग में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से टसर कीट पालन और धागाकरण का प्रशिक्षण शुरू किया गया। इस प्रशिक्षण के लिए करीब 29.49 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
बुनकरों को 86.96 लाख की सहायता
हाथकरघा प्रभाग के तहत बुनकरों के लिए भी कई घोषणाएं की गईं। उन्नत उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 122 हितग्राहियों के लिए 21.96 लाख रुपये तथा 26 बुनकरों को व्यक्तिगत वर्कशेड-सह-आवास के लिए 65 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई। इस तरह कुल 86.96 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया।
इसके अलावा बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास केंद्रों से जुड़े 80 हितग्राहियों के नवीन बुनाई प्रशिक्षण की शुरुआत की गई।
‘बिलासा हैंडलूम’ की वेबसाइट लॉन्च
छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए ‘बिलासा हैंडलूम’ की व्यावसायिक वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया। इसका उद्देश्य प्रदेश के बुनकरों के उत्पादों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराना है।
वहीं, बुनकरों के स्वास्थ्य से जुड़ी पहल के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक द्वारा सीएसआर मद से 250 ईयरफोन वितरित किए गए।
100 से ज्यादा हितग्राहियों को 50 लाख की अनुदान राशि
मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) के तहत 100 से अधिक हितग्राहियों को 50 लाख रुपये की अनुदान राशि वितरित की गई। इसके साथ ही कारीगरों को 67,500 रुपये की प्रशिक्षण वृत्ति भी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में दो उत्कृष्ट बुनकरों और दो उत्कृष्ट कत्तिनों को 21-21 हजार रुपये की प्रोत्साहन एवं सम्मान राशि दी गई।
कुंवरगढ़ और अंबिकापुर में नई सुविधाओं की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान कुंवरगढ़, रायपुर में 55 लाख रुपये की लागत से निर्मित खादी उत्पादन केंद्र और अंबिकापुर में 20 लाख रुपये की लागत से तैयार प्रीमियम खादी सेल्स आउटलेट का वर्चुअल शुभारंभ किया गया।
इसके अलावा जशपुर, कोरबा, बस्तर और सुकमा जिले की विशेष पिछड़ी जनजातियों की 30 महिलाओं को सोलर चरखे वितरित किए गए।
विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने बताया कि रायपुर जिले के कुंवरगढ़ स्थित प्रशिक्षण केंद्र में विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को हथकरघा और खादी के बचे हुए कपड़े से खिलौने बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे इन महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं ने वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण की संस्कृत में प्रस्तुति दी। वहीं, महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संघर्ष से प्रेरित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के संघर्ष पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी हुई।
राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम के माध्यम से महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत विभिन्न बोर्ड एवं आयोगों के अध्यक्ष, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।





