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SBI दे रहा घर में रखे सोने से कमाई करने का मौका, जानें कैसे और कितना मिलेगा फायदा?

SBI

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) अपने ग्राहकों के लिए खास स्कीम लेकर आया है. इस स्कीम में आप अपने घर में रखे सोने से कमाई कर सकते हैं. SBI ने ग्राहकों के फायदे को देखते हुए गोल्ड डिपॉजिट स्कीम को नए अवतार (R-GDS) में लॉन्च किया है. बता दें यह फिक्सड डिपॉजिट स्कीम हैं इसमें कस्टमर बैंक को गोल्ड जमा करता है और उसे बदले में बैंक की ओर से ब्याज का फायदा मिलता है. अगर आपके भी घर के लॉकर में गोल्ड की ज्वैलरी रखी है तो आप उसको घर में न रखकर बैंक में इस स्कीम के तहत जमा करा दें. इसमें आपकी ज्वैलरी सुरक्षित भी रहेगी और आपको ब्याज का फायदा भी मिलेगा. इस तरह आप घर पर रखी ज्वैलरी से आसानी से कमाई कर सकते हैं.

आइए आपको बताते हैं कि कौन इस स्कीम का फायदा ले सकता है-

  • कोई भी भारतीय नागरिक इस स्कीम का फायदा उठा सकता है.
  • SBI की इस स्कीम में कम से कम 10 ग्राम निवेश करना होगा.
  • इसके अलावा इसमें निवेश करने की कोई अपर लिमिट नहीं होती है.
  • इस स्कीम में निवेश करने वाला व्यक्ति प्रॉपराइटर, HUF, म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जो सेबी से रजिस्टर्ड होना चाहिए.
  • आप कॉइन. गोल्ड बार और ज्वैलरी के रूप में भी निवेश कर सकते हैं.

कितना ब्याज मिलेगा?

STBD स्कीम पर ब्याज की बात करें तो ग्राहकों को 1 साल के लिए 0.50 फीसदी सालाना ब्याज का फायदा मिलेगा. इसके अलावा 1 साल से ज्यादा और 2 साल तक के निवेश पर 0.55 फीसदी ब्याज का फायदा मिलेगा. वहीं, 2 साल से ज्यादा और 3 साल तक के निवेश पर ग्राहकों को 0.60 फीसदी सालाना ब्याज मिलेगा. वहीं, MTGD पर ब्याज की दर 2.25 फीसदी सालाना और LTGD पर ग्राहकों को 2.50 फीसदी ब्याज की सुविधा मिलेगी.

कितने समय के लिए कर सकते हैं निवेश

बता दें बैंक की इस स्कीम में आप शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर सकते हैं. शॉर्ट टर्म में आपको 1 से 3 साल, मिड टर्म में आपको 5 से 7 साल और लॉन्ग टर्म में 12 से 15 साल तक के लिए निवेश करना होगा.

किस तरह से करा सकते हैं रीपेमेंट

रीपेमेंट ऑप्शन में ग्राहकों को 2 तरह की सुविधाएं मिलती हैं. बैंक ने बताया कि या तो ग्राहक मैच्योरिटी सोने ले सकके हैं या फिर वही वैल्यु को कैश में लेने की भी सुविधा है. वहीं, गोल्ड के रूप में अगर आप रिटर्न लेते हैं तो 0.20 फीसदी का  एडमिनिस्ट्रेटिव चार्ज काटा जाता है.

 

 

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