कही-सुनी (19JULY-26) : 360 के फेर में अटका मामला

रवि भोई की कलम से
चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में भाजपा के 360 सदस्य करने की जुगत में लगे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व दो तिहाई स्पष्ट बहुमत का जुगाड़ कर लोकसभा की सीटों का परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पास करवा लेना चाहती है। कुछ दल के सांसद बीजेपी से जुड़ भी गए हैं। कहते हैं 360 के चक्कर में न तो बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति हो पा रही है और न ही केंद्रीय मंत्रिमडल का विस्तार हो पा रहा है। केंद्र में फेरबदल न हो पाने के कारण राज्यों में भी बदलाव अटका है। छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन के बदलाव की हवा कई दिनों से चल रही है। राज्य के एक मंत्री और एक विधायक के केंद्रीय पदाधिकारी बनने की अटकलें चल रही है। दिल्ली में फेरबदल के बाद ही स्थिति साफ़ होगी। केंद्र में सहयोगी दलों को पुरस्कार मिलना तय माना जा रहा है। फार्मूला बनने और पिक्चर साफ़ होने के बाद छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों में भी सरकार में चेहरे बदल सकते हैं।
नकटी का खेल ही निराला
कहते हैं विधायकों को सस्ती दर पर जमीन देने के लिए नकटी गांव के लोगों को बेदखल करने का मामला सीधा और सरल नहीं है। मामला बड़ा पेचीदा है और इसमें कुछ राजनेताओं और बिल्डरों का स्वार्थ भी जुड़ा हुआ है। नकटी गांव रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से काफी करीब है। बताते हैं नकटी गांव और उसके आसपास कुछ बिल्डरों की जमीन है। ये बिल्डर ऊँची पहुँच वाले हैं और राजनेताओं के करीब भी। सुनने में आ रहा है कि नकटी गांव और उसके आसपास एक बिल्डर की कई एकड़ जमीन है। बिल्डर बड़ा प्रोजेक्ट लाना चाहता है। विधायक कालोनी बन जाने से बिल्डर का प्रोजेक्ट सोना उगलने लगेगा। राज्य के एक मंत्री को इस बिल्डर का पार्टनर बताया जा रहा है। खबर है कि नकटी में एक अधिकारी की भी साढ़े 12 एकड़ जमीन है। प्रशासन ने अवैध कब्जा के आधार पर कुछ दिनों पहले नकटी गांव के लोगों की बसाहट को हटा दिया। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया हुआ है। वह सदन के भीतर और सड़क पर इस मुद्दे पर ताकत दिखा रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के आसपास एरोसिटी भी विकसित करना चाहती है। इस कारण भी बिल्डर नकटी और उसके आसपास के गांव को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी मानकर चल रहे हैं।
सचिव और ओएसडी में तनातनी
कहते हैं एक सचिव और एक ओएसडी के बीच तनातनी चल रही है। सचिव और ओएसडी पहले भी साथ काम कर चुके हैं और दोनों के बीच ट्यूनिंग अच्छी मानी जाती थी। बताते हैं जब दोनों साथ काम करते थे, तब सचिव हाई लेवल पर नहीं थे और न ही नीति निर्धारक। अब सचिव महोदय काफी पावर में बताए जाते हैं। सुनने में आ रहा है कि दोनों के बीच एक निर्माण विभाग के कामकाज को लेकर तनातनी चल रही है। ओएसडी अपने मनमाफिक काम करवाना चाहते हैं। सचिव उसके लिए राजी नहीं हो रहे हैं। ओएसडी को एक ठेकेदार ने पकड़ रखा है। ठेकेदार के कहे अनुसार ओएसडी साहब काम करवाना चाहते हैं। ये ठेकेदार बड़ा चर्चित है। यह ठेकेदार कुछ साल पहले एक निर्माण विभाग के मुखिया का चहेता था। मुखिया के नाम पर उस निर्माण विभाग में अपना सिक्का जमा रखा था। मुखिया रिटायर हो गए, तो अब ओएसडी साहब को पकड़ लिया है।
क्यों नहीं बदले बड़े जिले के एसपी ?
सरकार ने पिछले हफ्ते कुछ जिलों के एसपी बदले, पर दो-ढाई साल एक ही जिले में तैनात रहने वाले एसपी को इधर-उधर नहीं किया गया और न ही किसी को हटाया गया। कहते हैं सरकार बड़े जिलों के एसपी को इंटरचेंज करना चाहती थी, पर समीकरण फिट नहीं बैठ पाने के कारण मामला टल गया। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद पदस्थ कुछ एसपी अभी भी उसी जिले में तैनात हैं, तो कुछ डीआईजी बनने के बाद भी कप्तानी कर रहे हैं। चर्चा है कि सरकार अगले कुछ महीनों में बड़े जिलों के एसपी में हेरफेर की प्लानिंग कर रही है। कहा जा रहा है कि अगले हफ्ते तक पुलिस मुख्यालय स्तर पर बड़े आईपीएस अफसरों के प्रभार में भी बदलाव हो सकता है। गृह विभाग बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
सुर्ख़ियों में भाजपा नेता
कहते हैं बीजेपी के नेता इन दिनों काफी सुर्ख़ियों में हैं। कभी संगठन से जुड़े ये भाजपा नेता आजकल एक मंत्री के काफी करीबी बन गए हैं। मंत्री जी के पास कई विभाग हैं और सभी विभागों में भाजपा नेता की दखलंदाजी रहती है। चर्चा है कि मंत्री जी भाजपा नेता पर आँख मूंद कर भरोसा कर रहे हैं और नेताजी चांदी काटने में लगे हैं। बाजार में हल्ला है कि नेताजी करोड़ों के आसामी बन गए हैं। भाजपा के भीतर ही खोजबीन चल रही है कि नेताजी मंत्री जी के इतने विश्वासपात्र कैसे बन गए और मंत्री जी उन पर इतना भरोसा कैसे करने लग गए हैं।
मानसून सत्र में अजय चंद्राकर की बैटिंग
छत्तीसगढ़ विधानसभा के 13 से 17 जुलाई तक चले मानसून सत्र में भाजपा के विधायक अजय चंद्राकर ने अपना आक्रामक तेवर बरकरार रखा। लोगों को लग रहा था कि नई राजनीतिक परिस्थिति में अजय चंद्राकर थोड़ा धीरे चलेंगे। अजय चंद्राकर ने सवालों के माध्यम से कुछ मंत्रियों को घेरा तो टीका-टिप्पणी के जरिए विपक्ष कांग्रेस के सदस्यों को लपेटा। एक-दो मौकों पर तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से तकरार हो गई और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने अजय चंद्राकर पर सवाल दागे। मानसून सत्र में गर्माहट कम देखने को मिला। मंत्रियों का परफॉर्मेंस भी कुछ खास नहीं रहा। उद्योग और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने भूपेश बघेल को पूर्व मुख्यमंत्री की जगह मुख्यमंत्री कह दिया, फिर भूल सुधार किया।
छवि बदलने की कोशिश में महंत
विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ ढ़ाई साल बाद अविश्वास प्रस्ताव लाकर कांग्रेस ने आक्रामक होने के संकेत दिया, वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत भी नई भूमिका में आए। सहज,सरल और शांत स्वभाव के चरणदास महंत ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिए अपनी नई छवि निखारने की कोशिश की। कांग्रेस ने साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश तो की, पर कांग्रेस में एकजुटता की कमी दिखी। अविश्वास प्रस्ताव ढाई साल के सरकार के कामकाज के आसपास टिका रहा। कांग्रेस के सदस्यों से ज्यादा तेवर बीजेपी के सदस्यों ने दिखाया। अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सदस्यों को अपनी-अपनी बात कहने को मौका मिल गया। लोग उम्मीद कर रहे थे कि ढाई साल बाद अविश्वास प्रस्ताव आया है तो 20-20 मैच की तरह होगा, पर चला टेस्ट मैच की तरह। कहते हैं अविश्वास प्रस्ताव पर दोनों पक्ष की तरफ से 48 लोगों के बोलने की सूची बनी थी। पर लंबा खींचता देख कुछ कांट-छांट करने के बाद भी सदन सुबह तीन बजे तक चली।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
(डिस्क्लेमर – कुछ न्यूज पोर्टल इस कालम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सभी से आग्रह है कि तथ्यों से छेड़छाड़ न करें। कोई न्यूज पोर्टल कोई बदलाव करता है, तो लेखक उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। )





