सब्सिडी विवाद के बाद केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने लौटाए ₹99 लाख, संसद में सरकार ने किया खुलासा

० लोकसभा में सरकार ने दी जानकारी, कहा- नियमों के तहत मिली थी सहायता; हितों के टकराव पर कोई अलग प्रावधान नहीं
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा संरक्षित खेती के लिए प्राप्त ₹99 लाख की सरकारी सब्सिडी लौटाने का मामला बुधवार को संसद में उठा। केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि विवाद सामने आने के बाद भागीरथ चौधरी ने पूरी अनुदान राशि संबंधित बैंक में जमा करा दी है, जिसे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही है।
दरअसल, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की संरक्षित खेती योजना के तहत पात्र किसानों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹1 करोड़ तक का अनुदान दिया जाता है। इसी योजना के तहत भागीरथ चौधरी की 16,592 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित खीरे की संरक्षित खेती परियोजना के लिए ₹99 लाख की सब्सिडी स्वीकृत की गई थी।
अनुदान मिलने के बाद विपक्ष ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बताते हुए सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में इस संबंध में सरकार से जवाब मांगा था।
इसके जवाब में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि भागीरथ चौधरी ने स्वेच्छा से पूरी राशि वापस कर दी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों में किसी संवैधानिक पद या सरकारी दायित्व निभा रहे जनप्रतिनिधि को इस योजना का लाभ लेने से रोकने का कोई अलग प्रावधान नहीं है।
सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की सब्सिडी पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पात्रता के आधार पर स्वीकृत की जाती है। साथ ही यह भी बताया गया कि राजस्थान के सिरोही से भाजपा सांसद लुम्बाराम ने भी इसी योजना के तहत अनुदान प्राप्त किया है।





