Air India Flight Incident: 300 नहीं, 676 फीट नीचे गिरा था विमान; 4 सेकंड तक कंट्रोल सरफेस ने किया काम बंद

नई दिल्ली। एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही उड़ान AI 2379 में 4 अगस्त को हुई तकनीकी गड़बड़ी को लेकर नई जानकारी सामने आई है। शुरुआती जांच के मुताबिक विमान करीब 60 सेकंड में 676 फीट नीचे आया था, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में इसके 300 फीट नीचे जाने की बात कही गई थी।
4 सेकंड तक कंट्रोल सिस्टम ने किया काम बंद
शुरुआती जांच में पता चला है कि उड़ान के दौरान विमान के मुख्य कंट्रोल सरफेस, जिनमें एलिवेटर और एलरॉन शामिल हैं, करीब 4 सेकंड तक एक साथ पूरी तरह काम नहीं कर रहे थे। इसी हाइड्रोलिक फेलियर के कारण स्पॉइलर भी काम नहीं कर पाए।
तकनीकी गड़बड़ी के दौरान विमान का नोज ऊपर उठ गया और विमान करीब 36,401 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। इसके बाद सह-पायलट ने आपात प्रक्रिया के तहत विमान का नोज नीचे किया।
एक मिनट में 676 फीट का गोता
नोज नीचे किए जाने के बाद विमान महज 60 सेकंड में 36,401 फीट से 35,725 फीट की ऊंचाई पर आ गया। यानी विमान ने करीब 676 फीट की ऊंचाई गंवाई, जो लगभग 60 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर बताई जा रही है।
विमान के तेजी से नीचे आने के दौरान सीट बेल्ट नहीं लगाए बैठे कुछ यात्रियों के अपनी सीटों से उछलने की जानकारी सामने आई है। कुछ यात्री और सामान केबिन में टकराए, जिससे चोटें भी आईं।
एअर इंडिया ने शुरू की पायलटों की ड्रग स्क्रीनिंग
इस घटना के बाद एअर इंडिया ने उड़ान सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 13 अगस्त से एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के 5,000 से अधिक पायलटों की अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू की गई है।
एयरलाइन के मुताबिक प्रतिबंधित पदार्थों और दवाओं की जांच का उद्देश्य उड़ान सुरक्षा को मजबूत करना और पायलटों के लिए उच्च पेशेवर मानकों को सुनिश्चित करना है।
फुकेट-दिल्ली उड़ान में हुई तकनीकी घटना की जांच अभी जारी है। शुरुआती जांच में सामने आए हाइड्रोलिक फेलियर और कंट्रोल सिस्टम से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।





