Bihar Flood: वैशाली में बाढ़ का कहर, 22 दिनों में डूबने से 19 की मौत; मासूम बच्चे भी बने शिकार, प्रशासन पर उठे सवाल

हाजीपुर। बिहार के वैशाली जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। बाढ़ के पानी ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 23 अगस्त से 13 सितंबर के बीच जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में डूबने की घटनाओं में 19 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में 15 महीने की बच्ची और तीन साल का मासूम भी शामिल है।
राघोपुर में सबसे ज्यादा असर
बाढ़ का सबसे गंभीर प्रभाव राघोपुर प्रखंड में देखने को मिल रहा है। यहां करीब 20 पंचायतों के 76 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। कई जगहों पर आवागमन का मुख्य साधन नाव ही रह गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई बार जान जोखिम में डालकर बाढ़ का पानी पार करना पड़ रहा है। इससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
नाव और रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर सवाल
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासनिक इंतजामों पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रभावित इलाकों में पर्याप्त नाव, गोताखोर और एसडीआरएफ की व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि राघोपुर हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, इसके बावजूद ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं बन पाई है।
हर साल बाढ़, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार
राघोपुर क्षेत्र के लोगों के लिए बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ हर साल बड़ी आबादी प्रभावित होती है। इस दौरान आवागमन, राहत और बचाव सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं।
लगातार हो रही डूबने की घटनाओं ने एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और राहत व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण अब तत्काल राहत के साथ-साथ बाढ़ से निपटने के लिए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।




