#संपादकीय

कही-सुनी (04 OCT-26) : अमन सिंह के पदचिन्हों पर शीतल शाश्वत वर्मा

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रवि भोई की कलम से

भारतीय राजस्व सेवा की 2005 बैच की अधिकारी और वित्त विभाग की विशेष सचिव शीतल शाश्वत वर्मा ने वीआरएस लेकर छत्तीसगढ़ सरकार में ही अपने पैर जमा लिए हैं। विष्णुदेव साय की सरकार ने शीतल शाश्वत वर्मा को पांच साल के लिए संविदा नियुक्ति दे दी है। शीतल शाश्वत वर्मा केंद्र सरकार की जगह पिछले छह साल से छत्तीसगढ़ सरकार में प्रतिनियुक्ति पर थीं। केंद्र सरकार ने उन्हें आगे एक्सटेंशन देने से मना कर दिया तो वीआरएस ले लिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें संविदा में पांच साल के लिए रख लिया है। संविदा नियुक्ति के दौरान वे वित्त विभाग की विशेष सचिव रहेंगी ही, साथ में मुख्य सचिव कार्यालय में भी विशेष सचिव होंगी। कहते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार में आजकल 2005 बैच के अफसरों का दबदबा है। 2005 बैच के आईएएस रहे ओपी चौधरी अभी राज्य के वित्त मंत्री हैं, तो 2005 बैच के कई अफसर महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कहते हैं वित्त मंत्री चौधरी और 2005 बैच के एक अफसर की पसंद पर ही शीतल शाश्वत वर्मा को पांच साल के लिए राज्य शासन ने संविदा पर रखा गया है। डॉ रमनसिंह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहे अमन कुमार सिंह भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे। मुख्यमंत्री के ओएसडी के तौर पर आए,फिर सचिव और प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी निभाई। भारत सरकार ने प्रतिनियुक्ति अवधि बढाने से इंकार कर दिया तो अमन सिंह ने वीआरएस ले ली थी। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने उन्हें पांच साल के लिए संविदा नियुक्ति दे दी थी। राज्य में रमन सिंह की सरकार के रहते तक उन्हें संविदा नियुक्ति मिलती रही। प्रतिनियुक्ति अवधि और संविदा मिलाकर अमन सिंह करीब 15 साल तक छत्तीसगढ़ में सेवाएं दीं। राज्य में 2018 में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार आई तो वे इस्तीफा देकर चले गए। डॉ रमन सिंह के राज में अमन सिंह सरकार के केंद्र बिंदु थे।

भाजपा को नहीं मिले नए प्रचारक

आमतौर पर भाजपा में संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभालने के लिए आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के पूर्णकालिक प्रचारक आते हैं। संघ ही भेजता है, उसके बाद भाजपा नेतृत्व उन्हें केंद्रीय संगठन और राज्यों की जिम्मेदारी सौंपता है। बताते हैं संघ ने इस बार भाजपा में नए प्रचारक नहीं भेजे। हल्ला है कि संघ ने नए प्रचारकों को भाजपा में भेजने से मना कर दिया। इसके चलते भाजपा हाईकमान को पुराने प्रचारकों से ही अदला-बदली कर काम चलाना पड़ा। लोग कह रहे हैं कि भाजपा को ताश के पुराने पत्ते ही फेटने पड़े। चर्चा है कि आरएसएस से नए प्रचारक नहीं मिलने के कारण भाजपा हाईकमान को नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री के रूप में सौदान सिंह को मुख्यधारा में लाना पड़ा। राम माधव जैसे संघ के पुराने प्रचारकों की भाजपा संगठन में वापसी हुई। नए प्रचारक न होने की वजह से ही नयापन करने की कोशिश में छत्तीसगढ़ के संगठन मंत्री पवन साय को झारखंड भेजा गया और झारखंड में संगठन मंत्री का काम देख रहे कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दे दी गई। क्षेत्रीय संगठन मंत्री के रूप में दो राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे अजय जामवाल को महाराष्ट्र का संगठन महामंत्री बनाना पड़ा।

प्रमुख सचिव को सीएस की जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील सात अक्टूबर तक विदेश दौरे पर रहेंगे। कहते हैं इस दौरान मुख्य सचिव की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव निहारिका बारीक संभालेंगी। निहारिका बारीक 1997 बैच की आईएएस हैं और अभी राज्य की प्रमुख सचिव गृह हैं। राज्य में ऋचा शर्मा और मनोज पिंगुआ अपर मुख्य सचिव हैं। दोनों 1994 बैच के आईएएस हैं और मुख्य सचिव विकासशील के बैच के अफसर हैं। बताते हैं दोनों अफसरों के अवकाश पर रहने के कारण सरकार को प्रमुख सचिव को प्रभारी मुख्य सचिव बनाना पड़ा। अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा निजी प्रवास पर विदेश गई हैं और मनोज पिंगुआ अपने पारिवारिक कारणों से छुट्टी पर और राज्य से बाहर हैं। रेणु पिल्लै और सुब्रत साहू वरिष्ठ अफसर हैं, लेकिन दोनों की पोस्टिंग मंत्रालय से बाहर है और दोनों ही मुख्य सचिव विकसशील से वरिष्ठ हैं।मुख्य सचिव विकासशील मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ सिंगापुर दौरे पर हैं।

प्रीतेश गांधी ने सबको पीछे छोड़ा

छत्तीसगढ़ भाजपा कार्यालय के सह कार्यालय मंत्री प्रीतेश गांधी की सेवादारी इन दिनों चर्चा में हैं। प्रीतेश गांधी छत्तीसगढ़ भाजपा के नए संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह की अगवानी रांची में ही कर आए। बताते हैं कि कर्मवीर सिंह रविवार चार अक्टूबर को राजधानी रायपुर आएंगे। प्रीतेश गांधी नए संगठन महामंत्री के साथ ही आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता नए संगठन महामंत्री से उनके रायपुर आने पर ही उनसे भेंट -मुलाक़ात करेंगे। प्रीतेश ने तो सबको पीछे छोड़ दिया। प्रीतेश गांधी छत्तीसगढ़ भाजपा पुराने संगठन महामंत्री पवन साय और नए संगठन महामंत्री कर्मवीर के साथ बाबा वैद्यनाथ के दर्शन किए। फिर पवन साय के जशपुर निवास में भी नजर आए। छत्तीसगढ़ भाजपा के कार्यालय मंत्री अशोक बजाज हैं।

मंत्री और निगम अध्यक्ष की जुगलबंदी चर्चा में

छत्तीसगढ़ के एक मंत्री और एक निगम अध्यक्ष की जुगलबंदी चर्चा में है। कहते हैं कि दोनों मिलकर कुछ निजी और सरकारी प्रोजेक्ट पर काम भी कर रहे हैं। बताते हैं दोनों नेताओं को निर्माण कार्यों की अच्छी जानकारी है। सुनने में आ रहा है कि मंत्री जी के ऊंचे ख्वाब हैं और देर-सबेर एक नंबर की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं। अब मंत्री जी अपने लक्ष्य में कितने सफल होते हैं, यह तो समय बताएगा। मंत्री जी शासन-प्रशासन के कामकाज की बारीकियों को जानते और समझते हैं, फिलहाल तो वे अलग-अलग लोगों के कंधे का सहारा लेकर आर्थिक मजबूती में लगे हैं।

स्मृति ईरानी किसकी पसंद ?

भाजपा हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की प्रभारी महासचिव बनाया है। छोटे परदे से राजनीति में आईं स्मृति ईरानी को तेज-तर्रार नेता माना जाता है। स्मृति ईरानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी कहा जाता है , ऐसे में माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी की पसंद पर ही स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। यह भी कहा जा रहा है स्मृति ईरानी के माध्यम से छत्तीसगढ़ पर मोदी जी की सीधी नजर होगी। अब लोगों को स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे का इंतजार है। वैसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पिछले दिनों स्मृति ईरानी से भेंट की। कहा जा रहा है कि स्मृति के प्रभारी बनने से कई बदलाव देखने को मिलेंगे।

दीपक बैज चलते रहेंगे या बदलेंगे

उत्तरप्रदेश और पंजाब में नए पीसीसी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद चर्चा चल पड़ी है कि छत्तीसगढ़ को भी जल्द पीसीसी अध्यक्ष मिलेगा या दीपक बैज ही अभी चलते रहेंगे। उत्तरप्रदेश और पंजाब में जल्दी चुनाव होने हैं। छत्तीसगढ़ में 2028 में विधानसभा चुनाव है। कुछ महीने पहले पीसीसी चीफ के लिए पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव का नाम उछला था ,पर अब ठंडा पड़ गया है। दीपक बैज आदिवासी वर्ग से आते हैं। ऐसे में आदिवासी नेता को हटाकर गैर आदिवासी को बनाए जाने पर सवाल खड़ा हो रहा था। अब कांग्रेस हाईकमान ने आदिवासी नेता सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया है। सुखदेव भगत ने एक बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर नेताओं की बैठक ली है। अब आगे क्या होता है, देखते हैं।

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