#संपादकीय

कही-सुनी (01 NOV-26) : सरकार और संगठन में टेरर पैदा कर गई स्मृति ईरानी ?

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रवि भोई की कलम से

कहते हैं छत्तीसगढ़ प्रभारी और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी अपने दो दिन के रायपुर दौरे में सत्ता और संगठन के कुछ जिम्मेदार लोगों को आड़े हाथों लिया और उन्हें खरी-खरी सुनाया भी। चर्चा है कि पूर्व सांसद और विधायकों ने सरकार में अफसरशाही के हावी होने को लेकर जमकर शिकायत की। कुछ सांसद और विधायकों ने भी उनकी सिफारिश पर काम न होने की जानकारी दी। बताते हैं कि इसके बाद स्मृति ने कुछ मंत्रियों से जवाब-तलब किया। एक मंत्री से कहा -आपके काम तो एक अफसर ही करते हैं। स्मृति ने सार्वजनिक तौर से उस अफसर का नाम भी लिया। एक मंत्री से कहा-आपके विभाग में काम कराने के लिए फलां नेता से संपर्क करना पड़ता है। स्मृति ईरानी ने उस नेता का नाम भी लिया। इसी तरह कुछ और मंत्रियों के बारे में भी खुलासा किया। सुनने में आ रहा है कि छत्तीसगढ़ की यात्रा के पहले स्मृति ईरानी पूरा होम वर्क करके आई थी। कुछ टास्क पूरा न होने पर संगठन के एक पदाधिकारी को भी आड़े हाथों लिया। स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को प्रदेश बीजेपी दफ्तर में सत्ता और संगठन के लोगों, सांसद-विधायक, पूर्व सांसद व विधायक और निगम-मंडल के पदाधिकारियों की बैठक ली। चर्चा है कि सहकारी नेताओं को भी स्मृति ईरानी ने पानी-पानी कर दिया। उनमें आपस में तालमेल न होने पर सवाल भी खड़े किए। स्मृति ने छत्तीसगढ़ आने से पहले ही सख्त संदेश दे दिए थे। स्वागत के बैनर -पोस्टर और विज्ञापन पर मनाही कर दी थी। स्थानीय भाजपा नेताओं ने स्मृति के स्वागत के लिए बाइक रैली का आयोजन किया था, जिसे भी रद्द करना पड़ा। स्मृति ने विमानतल पर चुनिंदा लोगों के ही बुके स्वीकार किए। कहते हैं एक जिला अध्यक्ष विमानतल पर अपने कुछ लोगों का स्मृति ईरानी से परिचय कराना चाहा। इस पर स्मृति ने दो टूक कह दिया, वे स्वयं उनका परिचय ले लेंगी। उनकी आवश्यकता नहीं है। हल्ला है कि स्मृति ईरानी की पहली यात्रा के तेवर से सत्ता और संगठन में फिलहाल तो दहशत बन गया है।

मंत्री के बंगले में जमीन कारोबारियों का जमावड़ा

कहते हैं छत्तीसगढ़ के एक मंत्री के बंगले में रात को राजधानी के जमीन कारोबारियों का चौपाल लगता है। यही रणनीति बनती है और अफसरों को फोन होते हैं। सुनने में आ रहा है कि मंत्री जी अपने चहेते जमीन कारोबारियों के दबाव में रियल इस्टेट के कारोबार में लगे भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के कान मरोड़ देते हैं। इससे भाजपा के नेता और कार्यकर्ता काफी दुखी बताए जाते हैं। जमीन कारोबारियों से मंत्री जी जुगलबंदी के चलते बीजेपी के लोग ही उनकी तुलना भूपेश बघेल राज के एक महापौर से करने लगे हैं। कहने लगे हैं कि मंत्री जी के जमीन कारोबारी प्रेम का खामियाजा 2028 के विधानसभा चुनाव में रायपुर शहर के चारों बीजेपी विधायकों को उठाना न पड़ जाय। बताते हैं कि मंत्री जी जमीन कारोबारियों से अपने सरकारी बंगले में नहीं मिलते। वे एक प्राइवेट कालोनी स्थित अपने बंगले में मिलते हैं। इस प्राइवेट कालोनी में कई अफसर भी रहते हैं। अब देखते हैं मंत्री जी का जमीन कारोबारियों का मोह और बीजेपी कार्यकर्ताओं का अंतर्द्वंद क्या रंग लाता है।

एएसपी अभिषेक माहेश्वरी फिर सुर्ख़ियों में

भूपेश बघेल के कार्यकाल में काफी चर्चा में रहे राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अभिषेक माहेश्वरी फिर सुर्ख़ियों में हैं। इस बार वे अपने तबादले को लेकर लोगों की निगाह में चढ़ गए हैं। दो दिन पहले ही सरकार ने उन्हें 16 वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल नारायणपुर के उप सेनानी पद से स्थानांतरित कर 21 वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल करकाभाट (बालोद )के उप सेनानी पद पर पदस्थ कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से भाजपा का एक वर्ग नाखुश है। राज्य में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने पर दंड के स्वरूप अभिषेक माहेश्वरी को नारायणपुर भेजा गया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भूपेश सरकार के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया था। इस आरोप पत्र में कुछ अफसरों के नाम का भी उल्लेख किया गया था। बताते हैं इसमें अभिषेक माहेश्वरी का भी नाम था। बीजेपी के भीतर अभिषेक माहेश्वरी के चाहने वाले उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए काफी दिनों से प्रयासरत थे, पर विरोध के कारण मामला अटक रहा था। बताते हैं अब सरकार के भीतर एक पावरफुल अफसर की कृपा से अभिषेक माहेश्वरी का कल्याण हो गया।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को दो महीने में मिले नौ जज

सितंबर और अक्टूबर का महीना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए शुभ रहा। सात सितंबर को उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज कृष्ण राम महापात्र ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16 वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। सितंबर महीने में ही सुषमा सावंत, संतोष शर्मा और सुधीर कुमार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज बने। ये तीनों बैच के कोटे से जज बनाए गए। अक्टूबर महीने के आखिर में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने अधिवक्ता आनंद शुक्ला, रतन निधि पुष्टि,शशांक ठाकुर और सौरभ शर्मा तथा जज रजनीश श्रीवास्तव एवं बलराम प्रसाद वर्मा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का जज बनाए जाने की मंजूरी दे दी। उम्मीद है कि बिलासपुर हाईकोर्ट में छह नए जजों की नियुक्ति का आदेश अगले हफ्ते जारी हो जाएगा। बताते हैं छह नए जजों की नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस समेत 20 जज हो जाएंगे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का स्ट्रेंथ चीफ जस्टिस समेत 22 जजों की है। कहते हैं 25 साल में पहली दफे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 20 जज एक साथ रहेंगे।

सीबीआई के रडार में पांच आईपीएस

चर्चा है कि 2018 से 2023 तक कांग्रेस के राज में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी रहे पांच आईपीएस अफसर फिर सीबीआई की रडार पर हैं। एक बीजेपी नेता की शिकायत पर सीबीआई अलग-अलग मामलों में इन आईपीएस अफसरों की भूमिका को फिर संज्ञान में लेना शुरू कर दिया है। सुनने में आ रहा है कि सीबीआई इन अफसरों को नोटिस देकर फिर तलब करने की सोच रही है। भूपेश बघेल की सरकार में ये अफसर मलाईदार पदों पर थे। भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार में इन्हें साइड लाइन कर दिया गया है। बताते हैं इनमें से एक अफसर अध्ययन अवकाश पर चले गए हैं। अब लोगों को सीबीआई के कदम का इंतजार है।

(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)
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