कर्नाटक में सियासी संकट खत्म, सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार; नई सरकार गठन का रास्ता साफ

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव औपचारिक रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया है, जिसके साथ ही राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राजभवन से जारी आदेश के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत यह कार्रवाई की गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई सरकार बनने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहेंगे।
इस्तीफे की स्वीकृति के बाद अब कर्नाटक में नई सरकार गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं, जिससे राज्य की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंपा था। उस समय राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरू से बाहर थे, जिसके कारण औपचारिक मंजूरी बाद में दी गई। अब राजभवन की पुष्टि के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी
नई सरकार गठन को लेकर बेंगलुरू से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक बेंगलुरू में प्रस्तावित है, जबकि पार्टी के शीर्ष नेता दिल्ली में मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार दोनों ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी को राज्य की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से दोनों नेताओं की मुलाकात हो सकती है। इन बैठकों में कर्नाटक की नई सरकार के स्वरूप, संभावित मंत्रिमंडल और विभागों के बंटवारे को लेकर अहम फैसले लिए जाने की संभावना है।
निर्णायक मोड़ पर पंहुचा घटनाक्रम
गौरतलब है कि 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच राजनीतिक खींचतान चर्चा में रही है। उस समय पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया के अनुभव को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।





