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सोमवती अमावस्या 2026: कब है साल की पहली सोमवती अमावस्या? जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा-विधि

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धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है। यह दिन पितरों के तर्पण, स्नान-दान और पुण्य कर्मों के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

कब है सोमवती अमावस्या 2026?

पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12:20 बजे होगा और इसका समापन 15 जून 2026 को सुबह 8:24 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 15 जून 2026, सोमवार को सोमवती अमावस्या का व्रत, स्नान और पूजा की जाएगी। वहीं पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए 14 जून का दिन अधिक उपयुक्त माना गया है।

सोमवती अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून 2026, दोपहर 12:20 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 15 जून 2026, सुबह 8:24 बजे
स्नान-दान का शुभ समय (ब्रह्म मुहूर्त): सुबह 4:04 बजे से 4:44 बजे तक
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या का व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। साथ ही पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने की भी परंपरा है।

मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अधिक मास में पड़ने के कारण इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का अक्षय पुण्य फल मिलता है।

सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें?
० प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
० भगवान शिव का जलाभिषेक और माता पार्वती की पूजा करें।
० पीपल के वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करें।
० पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
० जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान दें।
० धार्मिक मंत्रों का जाप और ध्यान करें।

क्या न करें?
० तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
० किसी का अपमान या अनादर न करें।
० क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचें।
० अमावस्या के दिन शुभ कार्यों में जल्दबाजी न करें।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए पूजा-पाठ, दान और तर्पण से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।