राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: SIT रिपोर्ट में बड़े खुलासे, ट्रस्ट पदाधिकारियों पर उठे सवाल; 25 से अधिक लोगों पर FIR की सिफारिश

अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में गठित एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के साथ-साथ कथित कमीशनखोरी, नियुक्तियों में अनियमितता और गणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर की आशंका जताई गई है। एसआईटी ने मामले से जुड़े कई अहम साक्ष्य और गवाहों के बयान भी रिपोर्ट में शामिल किए हैं।
मंगलवार को एसआईटी के सदस्य लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को गोपनीय रिपोर्ट सौंपी। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। एसआईटी ने इन्हें प्रथम दृष्टया लापरवाही का जिम्मेदार माना है, जबकि कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
सीसीटीवी फुटेज और गवाह बने अहम सबूत
जांच के दौरान एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। कुछ महत्वपूर्ण फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट में करीब 25 से 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
कमीशनखोरी के आरोप भी जांच के दायरे में
रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े कुछ करीबी लोगों और रिश्तेदारों का भी उल्लेख किया गया है। वहीं अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का जिक्र किया गया है। एसआईटी ने इन आरोपों से जुड़े बयानों और दस्तावेजों को भी रिपोर्ट में शामिल किया है।
बैंक अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
एसआईटी ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया से जुड़े बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर परिसर से धनराशि की आवाजाही के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस इसकी भनक तक नहीं लगा सकीं।
जल्द दर्ज हो सकते हैं केस
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज की जा सकती है। शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला अब राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रबंधन तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।





