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कही-सुनी ( 7-AUGUST-2022 ) : छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व के मुद्दे पर भूपेश सवार

रवि भोई की कलम से 


छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के हिंदुत्व के मुद्दे को पूरी तरह अपने कब्जे में कर लिया है। इससे केंद्र और राज्य के भाजपा नेता बड़े परेशान बताए जाते हैं। भूपेश बघेल ने गाय-गोबर-गोमूत्र के साथ-साथ राम वनगमन पथ और कौशल्या माता मंदिर के जरिए लोगों को साधा। गोमूत्र खरीदी करने वाले पहले राज्य का तगमा लेने के बाद पिछले दिनों कावड़ यात्रा के बहाने भाजपा के लिए राज्य में शून्यता पैदा कर दिया। छत्तीसगढियावाद और छत्तीसगढ़ की संस्कृति के माध्यम से जमीन पक्का करने वाले भूपेश बघेल के धर्म-कर्म तीर से भाजपा यहां छटपटाती नजर आ रही है। कांग्रेस के भीतर भूपेश बघेल की मजबूती टीएस सिंहदेव को दिए झटके से समझ आ गया है। वहीँ पांच अगस्त को महंगाई के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद दिल्ली में पार्टी के नेताओं के बीच उनका बढ़ा हुआ कद भी लोगों को दिख गया। राहुल गांधी के करीब बैठकर उन्होंने अपने विरोधियों को कई संदेश दे गए। राष्ट्रीय स्तर के भाजपा नेता मानने लगे हैं कि भूपेश बघेल के रहते 2023 में भाजपा की राह आसान नहीं है।

छत्तीसगढ़ भाजपा में सर्जरी की कवायद तेज

माना जा रहा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर छत्तीसगढ़ भाजपा में बदलाव की कवायद और अटकलें तेज हो गई है। नए क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के दौरे के बाद जिस तरह प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय दिल्ली के लिए उड़े, उससे बदलाव की अटकलें तेज हो गई। वैसे कहा जा रहा है कि अगले हफ्ते तक भाजपा में संगठन स्तर पर प्रदेश से लेकर जिला स्तर पर कुछ न कुछ बदलाव होगा। भाजपा का एक खेमा प्रदेश अध्यक्ष के साथ नेता प्रतिपक्ष को बदलने के अभियान में लगा है। कुछ लोग धरमलाल कौशिक की जगह अजय चंद्राकर का नाम चला रहे हैं, वहीँ प्रदेश अध्यक्ष के लिए अरुण साव और रामविचार नेताम का नाम हवा में तैरने लगा है। रायपुर जिला अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी की जगह किसी दूसरे को कमान देने की खबर चल पड़ी है।

कलेक्टर ने की पीआरओ से अभद्रता

आदिवासी क्षेत्र के एक जिले के कलेक्टर साहब का जिला जनसंपर्क अधिकारी से अभद्र व्यवहार चर्चा में है। कहते हैं एक खबर को लेकर कलेक्टर साहब आपा खो बैठे और जनसंपर्क अधिकारी से गाली-गलौच करने के साथ उन्हें एसडीएम दफ्तर में अटैच कर दिया। जिला जनसंपर्क अधिकारी ने कलेक्टर साहब के व्यवहार की सूचना अपने संघ को देने के साथ अपने उच्चाधिकारियों से ट्रांसफर का भी आग्रह किया है। कलेक्टर जिले का प्रशासनिक मुखिया होता है और मुखिया ही आपा खो दे तो फिर क्या कहा जाय। जनसंपर्क विभाग के अफसर सरकार की छवि चमकाने और सरकार की सकारात्मक चीजों को ही परोसने का काम करते हैं। अखबारों में क्या छपता है ? टीवी में क्या दिखता है ? और लोगों में क्या संदेश जाता है? यह बहुत मायने रखता है। यही वजह है कि आमतौर पर मुख्यमंत्री जनसंपर्क विभाग को अपने अधीन ही रखते हैं।

सीएफ साहब का एक सूत्री कार्यक्रम

कहते हैं एक सीएफ साहब (वन संरक्षक) से उनके मातहत डीएफओ और एसडीओ बड़े दुखी और परेशान हैं। कहा जा रहा है कि सीएफ साहब टारगेट पूरा करने के लिए मुख्यालय को छोड़कर इन दिनों अधिक से अधिक दौरे पर रहते हैं। चर्चा है कि मातहतों से सीएफ साहब की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। खबर है कि कुछ माह बाद ही रिटायर होने वाले सीएफ साहब अधिक से अधिक धन संग्रह के लक्ष्य में जुटे हुए हैं और जिस माह लक्ष्य पूरा नहीं होता है तो उनका पारा चढ़ जाता है और मातहतों पर अपना भड़ास निकालते हैं। मातहतों ने सीएफ साहब के रवैये को लेकर अपने उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की , लेकिन सीएफ साहब को एक मंत्री जी का चौतरफा संरक्षण मिलने की वजह से उनका कुछ नहीं बिगड़ रहा है और मातहतों की आवाज नक्कार खाने की तूती बनकर रह गई है।

महिलाओं की नजरों से गिरे एक भाजपा नेता

कहते हैं भाजपा के एक कद्दावर नेता महिलाओं की नजरों से गिरने लगे हैं। खबर है कि पिछले कुछ दिनों में कई महिलाओं ने भाजपा नेता को फेसबुक और व्हाट्सअप पर ब्लाक कर दिया है। भाजपा नेता का महिला प्रेम गाहे-बगाहे चर्चा में रहता है, माना जा रहा है कि पिछले दिनों पार्टी की एक बैठक में आरएसएस से जुड़े एक नेता के बयान के बाद महिलाओं ने ही सतर्कता बरतते हुए कदम उठा लिया है। वैसे इस भाजपा नेता का यू टर्न भी चर्चा में है। ये जिस नेता के बलबूते ऊंचाई को छुआ, उनसे ही किनारा कर दूसरे पाले के लोगों से दोस्ती का हाथ बढ़ाना शुरू कर दिया।

ईडी की दस्तक

छत्तीसगढ़ में पहली बार ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय ) ने सराफा और कपड़ा व्यापारियों के यहां दस्तक दी। अभी तक सराफा और दूसरे व्यापारियों के यहां आयकर विभाग के छापे की खबरें ही आती रही है। वैसे मुंबई और दूसरे महानगरों में ईडी सराफा और हवाला कारोबारियों के ठिकानों पर घुस चुका है। राज्य में सराफा और कपड़ा व्यापारियों के यहां ईडी के छापे के तरह-तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि पिछले दिनों राज्य में कुछ कारोबारियों के यहां आयकर विभाग के छापे के बाद मिले इनपुट के आधार पर ईडी एक्शन पर आया। ईडी के छापे के गिरफ्त में आया एक सराफा कारोबारी के बारे में चर्चा है कि वह दूसरों की जमापूंजी दबाने का माहिर खिलाड़ी है। कुछ साल पहले वह आयकर विभाग के अफसरों से पंगा लेकर सुर्ख़ियों में आया था।

प्रवक्ताओं पर पंगा

भाजपा ने चुनाव से पहले राज्य की कांग्रेस सरकार पर हमले तेज और आक्रामक करने के लिए प्रवक्ताओं की संख्या छह से बढाकर 12 कर दी है। पिछले दिनों प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने छह नए लोगों को पार्टी प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी। कुछ नए प्रवक्ताओं को लेकर पार्टी में खींचतान शुरू हो गई है और सवाल भी खड़े किए जाने लगे हैं। कहा जाने लगा है कि कई पद संभालने वालों को प्रवक्ता बनाने का क्या औचित्य है? खबर है कि सक्रिय और खाली लोगों को जिम्मेदारी न मिलने से पार्टी में ज्वाला भी फूटने लगी है।

गवर्नर को दिल्ली में मिलेगी नई गाड़ी

कहते हैं छत्तीसगढ़ सरकार दिल्ली में गवर्नर के इस्तेमाल के लिए एक लक्जरी गाड़ी खरीदने पर विचार कर रही है। इसके लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान में ढाई करोड़ रुपए के प्रावधान की कवायद चल रही है। कहा जा रहा है कि दिल्ली दौरे में गवर्नर के उपयोग के लिए मर्सिडीज, ऑडी या बीएमडब्ल्यू ख़रीदा जा सकता है। खबर है कि दिल्ली में गवर्नर के लिए नई गाड़ी खरीदने का प्रस्ताव काफी दिनों से चल रहा है। इस प्रस्ताव को प्रथम अनुपूरक अनुमान में शामिल नहीं किया जा सका। अब सेकेंड सप्लीमेंट बजट में शामिल कर विधानसभा से मंजूरी ली जाएगी। चर्चा है कि पहले कम बजट की गाड़ी खरीदी जानी थी, अब गाड़ी के लिए बजट प्रावधान बढ़ाया जाएगा। अच्छी बात है दिल्ली में छत्तीसगढ़ की शान दिखनी भी चाहिए।

नंदकुमार साय के सुकमा दौरे का मकसद ?

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के प्रथम नेता प्रतिपक्ष नंदकुमार साय का सुकमा दौरा चर्चा में है। आमतौर पर नेतागण बस्तर दौरा जगदलपुर जाकर निपटा लेते हैं, लेकिन साय जी सुकमा में डेरा डालकर भाजपा की जमीनी हकीकत से वाकिफ हो रहे हैं। साय जी फिलहाल संगठन में किसी बड़े पद पर नहीं हैं, लेकिन साय जी पार्टी के पुराने नेता हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के दूसरे बड़े नेता उन्हें अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे में साय जी के नक्सल प्रभावित इलाके में दौरा के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। वैसे कहा जा रहा है कि पिछले एक-दो सालों में नक्सल प्रभावित इलाके में भाजपा के आनुषंगिक संगठन आरएसएस और वनवासी कल्याण आश्रम की पहुँच बढ़ी है।

 

 


(-लेखक, पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

(डिस्क्लेमर – कुछ न्यूज पोर्टल इस कालम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सभी से आग्रह है कि तथ्यों से छेड़छाड़ न करें। कोई न्यूज पोर्टल कोई बदलाव करता है, तो लेखक उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। )


 

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