PWD में प्रमोशन पर घमासान: हाईकोर्ट में मामला लंबित, फिर भी SE से CE की DPC पर उठे गंभीर सवाल

रायपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) में अधीक्षण अभियंता (SE) से मुख्य अभियंता (CE) पद पर पदोन्नति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट में संबंधित याचिका लंबित होने के बावजूद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित किए जाने और वरिष्ठता क्रम में पीछे चल रहे अधिकारी को प्रमोशन दिए जाने की चर्चा ने विभाग में हलचल बढ़ा दी है।
वरिष्ठता में चौथे नंबर के अधिकारी के प्रमोशन पर सवाल
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को हुई DPC में मुख्य अभियंता (सिविल) पद के लिए पांच अधीक्षण अभियंताओं के नाम दावेदारी में थे। इनमें सुरेंद्र सिंह मांझी, एमएल उइके, जेपी तिग्गा, केपी संत और रघुनंदन सिंह शामिल हैं। वरिष्ठता क्रम में सुरेंद्र सिंह मांझी सबसे ऊपर बताए जा रहे हैं, जबकि केपी संत चौथे क्रम पर हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, रिक्त हुए मुख्य अभियंता के पद पर केपी संत को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, डीपीसी का विस्तृत विवरण और औपचारिक पदोन्नति आदेश अभी सामने नहीं आया है।
हाईकोर्ट में लंबित है याचिका
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि 2024 में SE से CE पदोन्नति से जुड़े नियमों और CR को लेकर केपी संत की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसी मामले की सुनवाई अभी लंबित बताई जा रही है।
आरोप है कि हाईकोर्ट में मामला लंबित रहने के बावजूद विभाग ने फैसला आने का इंतजार नहीं किया और पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।
CR को लेकर भी उठे सवाल
पूरे मामले में अधिकारी की CR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2023 के द्वितीय सेमेस्टर की छह महीने की CR में अधिकारी की ग्रेडिंग ‘क’ श्रेणी में थी, जिसे पदोन्नति के लिए ‘उत्कृष्ट’ श्रेणी में अपग्रेड किए जाने की बात सामने आई है।
विभागीय नियमों को लेकर जानकारों का कहना है कि कुछ परिस्थितियों में DPC को CR की श्रेणी में सुधार का अधिकार है, लेकिन ‘क’ को ‘क प्लस’ में अपग्रेड करने के अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, DPC के एक सदस्य द्वारा इस पर आपत्ति जताए जाने की भी चर्चा है।
2024 की पदोन्नति से भी जुड़ा है विवाद
SE से CE पदोन्नति का विवाद वर्ष 2024 से चला आ रहा है। उस समय सरकार ने विशेष परिस्थिति का हवाला देते हुए अनुभव की निर्धारित अवधि को पांच वर्ष से घटाकर चार वर्ष किए जाने की बात सामने आई थी।
अगस्त 2024 में एसएन श्रीवास्तव, भोलाशंकर बघेल, समयलाल विजय सिंह कोरम, एनके जयंत और आरके रात्रे को SE से CE पद पर पदोन्नत किया गया था।
वहीं, छत्तीसगढ़ लोक सेवा पदोन्नति नियम 2003 के तहत SE से CE पदोन्नति में आवश्यक अनुभव की अवधि को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इसी मुद्दे को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट और PSC के जवाब में अंतर का दावा
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पांच वर्ष के CR के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई, जबकि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से चार वर्ष के CR के आधार पर पदोन्नति का उल्लेख किया गया।
सरकार और PSC के जवाब में कथित अंतर को लेकर 2024 की पदोन्नति पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी वजह से हाईकोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फैसले से पहले ही दूसरी DPC पर सवाल
इधर, 10 अगस्त को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में PWD के कार्यपालन अभियंताओं को अधीक्षण अभियंता पद पर पदोन्नत करने के लिए भी DPC आयोजित की गई। हालांकि सभी रिक्त पदों को नहीं भरा जा सका।
बताया जा रहा है कि डिप्लोमा धारक कुछ कार्यपालन अभियंताओं को SE पद पर पदोन्नति देने को लेकर नियमों का पेच सामने आया है।
इसके अलावा PWD में विद्युत/यांत्रिकी के मुख्य अभियंता के एक पद के लिए भी DPC किए जाने की जानकारी है, जबकि यह पद 30 सितंबर को रिक्त होने वाला है। इस पद से संबंधित दावेदारों की याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित बताई जा रही है और सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित होने की बात कही जा रही है।
आदेश जारी होने का इंतजार
फिलहाल PWD की ओर से DPC का आधिकारिक विस्तृत विवरण या अंतिम पदोन्नति आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में क्या वरिष्ठता, CR की ग्रेडिंग और लंबित न्यायिक प्रक्रिया के बीच नियमों का पूरी तरह पालन हुआ है, यह सवाल बना हुआ है।
यदि पदोन्नति आदेश जारी होता है, तो उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विभाग ने किन नियमों और मानदंडों के आधार पर फैसला लिया है।




