Jitiya Vrat 2026: आज से शुरू हुआ जितिया व्रत, जानें पारण तक की पूरी विधि और नियम

Jitiya Vrat 2026: जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, सुख और सलामती की कामना के लिए रखा जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि से इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस बार नहाय-खाय 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को है, जबकि अष्टमी तिथि में महिलाएं निर्जला जितिया व्रत रखेंगी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को पड़ रही है। ऐसे में जितिया व्रत की शुरुआत से लेकर पारण तक कुछ विशेष नियमों और परंपराओं का पालन किया जाता है।
जितिया व्रत की नहाय-खाय विधि
आश्विन कृष्ण सप्तमी तिथि यानी नहाय-खाय के दिन व्रती महिलाएं झिमनी के पत्ते पर सरसों का तेल, सरसों की खली और फूल रखकर नदी या तालाब में स्नान करती हैं।
यदि नदी या तालाब में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद सिर पर सरसों का तेल लगाकर दोबारा स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सप्तमी तिथि के दिन स्नान करते समय साबुन का प्रयोग नहीं किया जाता।
स्नान के बाद सभी सामग्री के साथ भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। पूजा के बाद चढ़ाए गए सरसों के तेल को संतान के सिर पर आशीर्वाद के रूप में लगाने की परंपरा है। यदि झिमनी के पत्ते उपलब्ध न हों, तो केले के पत्ते का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
अष्टमी तिथि पर कैसे रखें जितिया व्रत?
अष्टमी तिथि के दिन व्रती महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठने की परंपरा है। ब्रह्म मुहूर्त में ओठगन किया जाता है। ओठगन में चूड़ा, दही, नारियल पानी और जल आदि ग्रहण करने की परंपरा कई क्षेत्रों में है। हालांकि, स्थानीय परंपराओं के अनुसार इसमें अंतर हो सकता है।
ओठगन के बाद सूर्योदय से पहले भोजन और जल ग्रहण किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है, यानी व्रती महिलाएं अन्न और जल दोनों का त्याग करती हैं।
व्रत के दिन जितिया व्रत कथा से पहले बांस के एक बर्तन में फल, नारियल, मिठाई आदि रखकर उसे कपड़े से ढकने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार व्रत के दौरान चाकू, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
जितिया व्रत में क्या ध्यान रखें?
जितिया व्रत के दौरान पूजा-पाठ और कथा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रती महिलाओं को पूरे दिन संयम रखते हुए भगवान जीमूतवाहन का स्मरण और पूजा करनी चाहिए। व्रत की विधि और खान-पान की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ भिन्न हो सकती हैं।
जितिया व्रत का पारण कब होगा?
जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि को किया जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर की सुबह 5:52 बजे तक रहेगी। ऐसे में सूर्योदय के बाद नवमी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा।
जितिया व्रत पारण की विधि
पारण के दिन व्रती महिला स्नान आदि करने के बाद विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद अपनी संतान से ढके हुए फल, मिठाई आदि पर से कपड़ा हटवाने की परंपरा है। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
मान्यता के अनुसार पारण के दिन आम के दातून से दातुन करने और कच्चे दूध से व्रत खोलने की भी परंपरा है। जितिया व्रत की कथा में चील द्वारा गाय का दूध लाकर व्रत खोलने का उल्लेख मिलता है।
नोट: जितिया व्रत की तिथि, पारण का समय और पूजा की विधि क्षेत्र एवं स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दें।




