Close

हसदेव अरण्य को बचाने सुप्रीम कोर्ट में प्रभावितों ने लगाईं याचिका

० 275 दिनों से चल रहे आंदोलन को तेज करने फिर जुटे ग्रामीण

अंबिकापुर। हसदेव अरण्य में कोयला खदानों को दी गई स्वीकृतियों के विरोध में शुरू हुए आंदोलन को आज 275 दिन पूरे हो गए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोल परियोजनाओं पर रोक लगाने स्थानीय प्रभावितों की याचिका को स्वीकार कर लिया है, लेकिन परियोजना पर तत्काल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। इधर मंगलवार को आंदोलन स्थल पर बड़ी लोग एकत्र हुए और आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया। छत्तीसगढ़ सरकार की नीति को लेकर भी आंदोलनकारियों ने रोष जताया।

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक एवं सरपंच पतुरियाडांड उमेश्वर आर्मो ने कहा कि राज्य सरकार ने परसा खदान की वन स्वीकृति को निरस्त करने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को पत्र लिखा है और व्यापक जान आक्रोश को संज्ञान में लिया है, लेकिन फर्जी ग्राम सभा और पर्यावरणीय चिंताओं के कोई उल्लेख नहीं किया। वे स्वयं ही अंतिम वन स्वीकृति निरस्त कर सकते हैं और परसा को रद्द कर सकते है। जब तक हसदेव अरण्य की सभी खदानें आधिकारिक रूप से निरस्त नहीं कि जाती, यह आंदोलन सतत चलता रहेगा।

फर्जी एफआईआर कराने का आरोप
साल्ही गांव से रामलाल करियाम, फत्तेपुर से मुनेश्वर पोर्ते ने कहा कि हमारे आंदोलन को कमजोर करने लगातार कंपनी और प्रशासन फर्जी एफआईआर करा रहे हैं। इन हथकंडों सर हम कमजोर नहीं होंगे। यह आंदोलन भी तेज होगा,क्योंकि व्यापक जान समर्थन इस संघर्ष के साथ जुड़ा है। हसदेव अरण्य को बचाने नए साल में अगले महीने हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति छत्तीसगढ़ के सभी जनवादी संघर्षों और प्रकृति प्रेमी लोगों से हसदेव में जंगल बचाने सम्मेलन में शामिल होने का आह्वान करेगी।

सुको ने याचिका स्वीकारी, रोक लगाने से किया इंकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को परसा कोल ब्लॉक के आदिवासी भू-विस्थापितों की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली। जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की खंडपीठ ने कोल प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग को अस्वीकार कर दिया। 11 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को बहुत देरी से दाखिल करने और मेरिट नहीं होना बता खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सरगुजा में मंगल साय और अन्य प्रभावितों ने परसा कोल ब्लॉक का भूमि अधिग्रहण 2017-18 में कोल बेअरिंग एक्ट के तहत करने के बाद खदान का हस्तांतरण राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा निजी कंपनी को करने के विरोध में याचिका लगाई है। नियमानुसार कोल बेअरिंग एक्ट से केवल केंद्र सरकार की सरकारी कंपनी को ही जमीन अधिग्रहित हो सकती हैं।

scroll to top