CG विधानसभा: भूपेश बघेल का साय सरकार पर हमला, बोले- ‘ढाई साल में हर मोर्चे पर फेल, अदृश्य शक्ति चला रही सरकार’

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। करीब एक घंटे के भाषण में उन्होंने सरकार को किसान, कानून-व्यवस्था, खाद संकट, आदिवासी मुद्दों, स्वास्थ्य और प्रशासनिक विफलताओं पर घेरते हुए कहा कि “ढाई साल में सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और ऐसा लगता है कि सरकार किसी अदृश्य शक्ति के इशारे पर चल रही है।”
RSS और मुसोलिनी का जिक्र, सदन में हुई तीखी नोकझोंक
भाषण की शुरुआत में भूपेश बघेल ने भाजपा विधायक अजय चंद्राकर की उस टिप्पणी का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर कांग्रेस नेतृत्व के प्रति निष्ठा को लेकर कटाक्ष किया था। बघेल ने बिना नाम लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि “सोनिया गांधी इटली से आईं, लेकिन भारत की होकर रह गईं, इस पर हमें गर्व है।”
इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.एस. मुंजे और मुसोलिनी का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर टिप्पणी की। इस पर अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई।
‘अदृश्य शक्ति चला रही सरकार’
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार बनने से पहले ही प्रदेश में किसी “अदृश्य शक्ति” ने फैसले लेने शुरू कर दिए थे। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार किसके इशारे पर चल रही है।
इस दौरान भाजपा विधायक सुनील सोनी ने मनमोहन सिंह सरकार का जिक्र किया, जिस पर बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति के बयानों का उल्लेख करते हुए जवाब दिया।
धान खरीदी और खाद संकट पर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि धान भीग रहा है, सड़ रहा है और संग्रहण केंद्रों में पड़ा है। उन्होंने किसानों को समय पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होने और बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदने को मजबूर होने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले कृत्रिम कमी पैदा करती है और फिर ऊंचे दामों पर खरीद कराती है, जिससे किसानों को प्रति बोरी 700 रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कृषि मंत्री से सदन में बहस
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि किसानों के सामने खाद की कोई समस्या नहीं है। इस पर भूपेश बघेल ने यूरिया और एनपीके खाद के उपयोग का सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है।
‘सरकार किसानों को ठग रही है’
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार धान के बदले दूसरी फसल लेने पर प्रोत्साहन राशि देने की बात तो करती है, लेकिन किसानों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की सहायता दी थी, जबकि वर्तमान सरकार किसानों की आय कम करने की दिशा में काम कर रही है।
राशन, महतारी वंदन और वित्तीय संकट का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवाईसी के कारण 30 लाख लोगों को राशन नहीं मिला, जबकि कोरोना काल में कांग्रेस सरकार ने घर-घर राशन पहुंचाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरक बजट (सप्लीमेंट्री बजट) नहीं लाई क्योंकि या तो उसके पास पैसा नहीं है या केंद्र से पर्याप्त राशि नहीं मिल रही।
इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब दिया कि राज्य सरकार वित्तीय रूप से मजबूत है और जरूरत पड़ने पर ही अनुपूरक बजट लाया जाता है।
कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो चुकी है। उन्होंने अवैध रेत खनन, हत्या, बलौदाबाजार हिंसा और महादेव ऐप मामले का उल्लेख करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपने सिस्टम पर भरोसा है तो कई मामलों की सीबीआई जांच करानी चाहिए।
पेसा कानून, हसदेव और तमनार का मुद्दा
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाई है। साथ ही हसदेव अरण्य और तमनार में जंगलों की कटाई और खनन को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में खनन के नाम पर लोगों की चिंता बढ़ी है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ सफलता का श्रेय सभी सरकारों को जाता है और इसे किसी एक सरकार की उपलब्धि नहीं बताया जा सकता।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी हमला
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने मेकाहारा अस्पताल की स्थिति, दवा खरीद और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवाएं खरीदी जा रही हैं।
‘सरकार को कुर्सी पर रहने का अधिकार नहीं’
अपने भाषण के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत 136 बिंदुओं का आरोप-पत्र सरकार के जनविरोधी फैसलों का दस्तावेज है। उन्होंने दावा किया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और “उसे एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है।”





