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ISRO EOS-05 Mission: अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांग, GSLV-F17 ने रचा इतिहास; पहली बार जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में पहुंचा अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट

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श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया। मिशन के करीब 22 मिनट बाद उपग्रह को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया।

इस मिशन को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि EOS-05 भारत का पहला समर्पित पृथ्वी अवलोकन इमेजिंग उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से पृथ्वी की निगरानी के लिए तैयार किया गया है।

36 हजार किमी के प्लेटफॉर्म से होगी पृथ्वी की निगरानी

ISRO प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक EOS-05 को करीब 36,000 किलोमीटर की भू-स्थिर प्लेटफॉर्म कक्षा की दिशा में स्थापित किया जाएगा। उपग्रह के परिचालन में आने के बाद भारत और आसपास के क्षेत्रों की लगातार निगरानी में मदद मिलेगी।

उपग्रह अत्याधुनिक इमेजिंग क्षमता से लैस है। इससे बेहतर दृश्य के साथ मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में इमेजिंग की सुविधा मिलने की बात कही गई है। इससे पृथ्वी की सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने में मदद मिलेगी।

GSLV की 19वीं उड़ान, सबसे भारी उपग्रह भी इसी मिशन में

EOS-05 को लेकर रवाना हुआ GSLV-F17, GSLV की 19वीं उड़ान है। ISRO के मुताबिक श्रीहरिकोटा से यह संगठन का 107वां प्रक्षेपण है।

EOS-05 का वजन करीब 2367 किलोग्राम बताया गया है और यह अब तक GSLV से भेजे गए उपग्रहों में सबसे भारी है। GSLV-F17 की लंबाई करीब 51.7 मीटर और लिफ्ट-ऑफ मास करीब 420.5 टन है। रॉकेट को सतीश धवन स्पेस सेंटर के सेकंड लॉन्च पैड से रवाना किया गया।

ISRO चीफ बोले- वैज्ञानिकों की टीम वर्क से मिली सफलता

प्रक्षेपण के बाद ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि GSLV में लगातार सुधार और तकनीकी उन्नयन के बाद यह वाहन अपने मौजूदा स्वरूप में काम कर रहा है।

उन्होंने मिशन की सफलता में वैज्ञानिकों के टीम वर्क के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र और वैज्ञानिकों के परिवारों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार ISRO आने वाले समय में कई और प्रक्षेपणों के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन पर भी तेजी से काम जारी है।

गगनयान पर भी बड़ा अपडेट

ISRO प्रमुख ने बताया कि गगनयान एक तकनीक-प्रधान मिशन है और अब तक करीब 8000 परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं। मानवयुक्त मिशन होने के कारण इसमें मानव सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि पहले तीन मानवरहित मिशनों की योजना है, जिसके बाद मानवयुक्त मिशन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। पहला मानवरहित मिशन इसी वर्ष प्रक्षेपण के लिए तैयार किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ISRO की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाई है।

उन्होंने EOS-05 को अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह बताते हुए कहा कि यह मिशन भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाला है और वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के तौर पर देश की स्थिति को और मजबूत करेगा।

मिशन में 18 सह-यात्री उपग्रह भी शामिल

EOS-05 मिशन को NSIL ने एक रणनीतिक उपयोगकर्ता के लिए समर्पित लॉन्च के तौर पर अंजाम दिया। इसके साथ भारत और अन्य देशों के उपयोगकर्ताओं के 18 सह-यात्री उपग्रह भी प्रक्षेपित किए गए।

मिशन की सफलता के बाद वैज्ञानिकों और मिशन डायरेक्टर थॉमस कुरियन ने टीम की उपलब्धि पर खुशी जताई। वैज्ञानिकों ने इसे चुनौतीपूर्ण मिशन बताते हुए पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को सफलता की अहम वजह बताया।