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राम मंदिर दान विवाद: पांच लोगों पर FIR की तैयारी, SIT रिपोर्ट में कई अहम खुलासों के संकेत

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से जुड़े कथित गबन और अनियमितताओं के मामले में एसआईटी जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें चंपत राय के करीबी बताए जा रहे टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प समेत अन्य नाम शामिल हैं, जिनके यहां से नकदी बरामद होने की बात सामने आई है।

20 घंटे से अधिक पूछताछ, जवाबों से बढ़ा संदेह

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने पहले चरण में पांचों संदिग्धों से 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाए, जिससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हुआ है। हालांकि, अंतिम फैसला एसआईटी की रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।

140 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार

जांच टीम अपनी प्रारंभिक पड़ताल पूरी कर अयोध्या से लखनऊ रवाना हो चुकी है। बताया जा रहा है कि करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

गोपाल राव की भूमिका पर भी उठे सवाल

जांच के बीच मंदिर निर्माण सहायक गोपाल राव के कर्नाटक दौरे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल हुई है, जिसमें वे एक कार्यक्रम में दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि एसआईटी जांच के दौरान कुछ लोगों की आवाजाही पर अनौपचारिक निगरानी रखी जा रही थी। हालांकि इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सूत्रों का कहना है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ सेवादारों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। दानपात्र प्रबंधन में लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर सेवाएं समाप्त करने जैसे कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

जांच अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव संभव

एसआईटी ने प्रारंभिक जांच लगभग पूरी कर ली है, लेकिन मामले का दायरा बढ़ने के कारण जांच अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा जा सकता है। जांच के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी जांच के दायरे में आ गई हैं।

सरकार की पैनी नजर

राम मंदिर जैसे राष्ट्रीय आस्था से जुड़े संवेदनशील मामले को देखते हुए प्रदेश सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ मंदिर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।