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मुंबई में 24 मंजिला इमारत में लगी आग,छह बुजुर्गों समेत 11 लोगों को दम घुटने की शिकायत के कारण अस्पताल में भर्ती

नेशनल न्यूज़। मुंबई के भायखला इलाके में गुरुवार को 24 मंजिला एक आवासीय इमारत में आग लग गई, जिसके बाद छह बुजुर्गों समेत 11 लोगों को दम घुटने की शिकायत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी लोगों की हालत स्थिर बताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह आग भायखला के घोडपदेव इलाके में महाराष्ट्र आवासीय एवं क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) कॉलोनी में न्यू हिंद मिल कंपाउंड में स्थित इमारत की तीसरी मंजिल पर सुबह तीन बजकर 40 मिनट पर लगी। इस जगह पर सरकार ने एक योजना के तहत लोगों को, मुख्य रूप से मिल श्रमिकों को फ्लैट दिए हैं।

आग शॉर्ट-सर्किट के कारण लगी
एक चश्मदीद व्यक्ति ने बताया कि बिजली के तारों के माध्यम से आग की लपटें ऊपरी मंजिलों तक फैल गईं, जिससे भयानक स्थिति पैदा हो गई। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आग की सूचना मिलने के बाद दमकल की पांच गाड़ियों और पानी के तीन टैंकर को घटनास्थल पर भेजा गया और सुबह सात बजकर 20 मिनट तक आग पर काबू पा लिया गया। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, ऐसा जान पड़ता है कि आग शॉर्ट-सर्किट के कारण लगी।

135 लोगों को सुरक्षित बचाया गया
अधिकारियों ने बताया कि इमारत की विभिन्न मंजिलों से कम से कम 135 लोगों को सुरक्षित बचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों में से 25 को छत से, 30 को 15वीं मंजिल से और 80 लोगों को 22वीं मंजिल से निकाला गया। अधिकारियों के मुताबिक छह बुजुर्गों समेत 11 लोगों ने सांस में धुंआ जाने से दम घुटने की शिकायत की। अधिकारियों ने कहा कि उनमें से नौ को बृहन्मुंबई महानगर पालिका द्वारा संचालित केईएम अस्पताल में और एक-एक को नायर अस्पताल तथा सरकारी जे जे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रास्ता ढूंढना बहुत मुश्किल था
एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है उनकी पहचान लक्ष्मी राउत (70), अर्चना मोरे (75), पार्वतीबाई तम्बोले (85), लता तम्बोले (67), प्रणय तम्बोले (28), अर्चना निलेश मोरे, मुमताज (60), अभिश (36), विशाल विजय मोरे (34), रजाक खान (80) और सविता कराडे (48) के रूप में हुई है। इमारत की 11वीं मंजिल पर अपने परिवार के साथ रहने वाले पेशे से इंजीनियर सिद्धेश गवाने ने कहा कि उनकी मां ने गंध महसूस की और दूसरों को जगाया, लेकिन धुएं से भरे गलियारे में किसी का रास्ता ढूंढना बहुत मुश्किल था।

हर तरफ धुआं था… ठीक से सांस नहीं ले पा रहे
सिद्धेश गवाने ने कहा, ‘‘एक भयानक स्थिति थी, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। हर तरफ धुआं था… हम ठीक से सांस नहीं ले पा रहे थे और मुश्किल से एक-दूसरे को देख पा रहे थे। ” इमारत की नौवीं मंजिल पर रहने वाले संभाजी भराडे ने कहा कि हादसे के समय उनके परिवार के सभी पांच सदस्य गहरी नींद में थे जब उनके पड़ोसियों ने उन्हें जगाने के लिए जोर से दरवाजा खटखटाया। इमारत में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि इमारत की आठवीं, 15वीं और 22वीं मंजिल पर शरण क्षेत्र हैं, लेकिन इमारत में रहने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है और कुछ लोगों ने शरण क्षेत्र में घरेलू सामान रखा था जिससे आवाजाही में बाधा उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि इमारत में लगी अग्निशमन प्रणाली भी ज्यादा मददगार नहीं थी।

 

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