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CIA एजेंट बनकर भारतवंशी ने लगाया अरबों का चूना! इंडोनेशिया सरकार तक बनाई पहुंच, रक्षा सौदों में बड़ा फर्जीवाड़ा का दावा

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नई दिल्ली/जकार्ता। भारतीय मूल के एक कारोबारी पर खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट बताकर इंडोनेशिया सरकार में घुसपैठ करने और अरबों डॉलर के रक्षा सौदों में कथित फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगा है। यह दावा ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की एक जांच रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारी गौरव श्रीवास्तव ने खुद को CIA से जुड़ा अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री और मौजूदा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास जीता और रक्षा सौदों के नाम पर प्रभाव स्थापित किया।

रक्षा सौदों के नाम पर बनाई करोड़ों की साख

आरोप है कि श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना के लिए 36 F-15 लड़ाकू विमान, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 परिवहन विमान और आधुनिक सैन्य कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम उपलब्ध कराने का दावा किया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर फर्जी शेल कंपनियों के जरिए करीब 425 करोड़ रुपये का कर्ज भी स्वीकृत करा लिया।

राष्ट्रपति तक बनाई सीधी पहुंच

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2020 के दौरान गौरव श्रीवास्तव वॉशिंगटन डीसी और जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुआ। इन बैठकों में रक्षा खरीद और सैन्य सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

इतना ही नहीं, उसने यह भी दावा किया कि 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों की पहचान कराने में उसकी भूमिका रही थी और उसने प्रबोवो सुबियांतो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन ब्लैकलिस्ट से हटवाने में भी मदद की थी।

शेल कंपनियों के जरिए किए रक्षा समझौते

OCCRP की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 से 2022 के बीच श्रीवास्तव से जुड़ी चार कंपनियों ने इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और सरकारी रक्षा कंपनी के साथ पांच प्रारंभिक रक्षा समझौतों (LOI और MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इन प्रस्तावित सौदों की कुल संभावित कीमत 13.9 अरब डॉलर तक बताई गई थी। हालांकि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीवास्तव की सभी कंपनियां केवल शेल कंपनियां थीं और उन्हें रक्षा क्षेत्र का कोई पूर्व अनुभव नहीं था।

पूर्व कारोबारी साझेदार ने खोला राज

यह पूरा मामला श्रीवास्तव के पूर्व कारोबारी साझेदार नील्स ट्रोस्ट द्वारा अमेरिका के कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क की अदालतों में दायर दीवानी मुकदमों के बाद सामने आया। ट्रोस्ट का आरोप है कि श्रीवास्तव ने खुद को CIA एजेंट बताकर इंडोनेशिया के शीर्ष नेताओं और उद्योगपतियों का भरोसा हासिल किया।

मुकदमे में शामिल रिकॉर्डेड फोन कॉल्स का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि श्रीवास्तव स्वयं को अमेरिकी खुफिया एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताता था और इसी आधार पर उसे सरकार के उच्चस्तरीय बैठकों तक पहुंच मिली।