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‘केंद्र और राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल’, भूपेश बघेल का साय सरकार और केंद्र पर तीखा हमला

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० खेती, खाद संकट, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्मार्ट मीटर और युवाओं पर कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Bhupesh Baghel ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने खेती, खाद संकट, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और युवाओं पर कार्रवाई जैसे कई मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।

खेती और खाद संकट पर सरकार को घेरा

भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में खंड वर्षा से खेती प्रभावित हुई है, लेकिन किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में डीएपी और यूरिया की भारी कमी है तथा खाद की कालाबाजारी हो रही है। गरियाबंद और कवर्धा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसान खाद के लिए परेशान हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जून से स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन अब तक कई बच्चों को न तो स्कूल बैग मिला है और न ही ड्रेस। उन्होंने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

स्मार्ट मीटर और बिजली बिल पर हमला

भूपेश बघेल ने स्मार्ट मीटर योजना को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ गए हैं और आम लोग परेशान हैं। साथ ही कहा कि मीटर रीडरों की नौकरियां भी खतरे में पड़ गई हैं। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर लोग स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहे हैं।

युवाओं पर कार्रवाई को लेकर सवाल

उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उनका आरोप था कि सरकार ने पहले कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साधा निशाना

भूपेश बघेल ने बस्तर और कांकेर में मलेरिया से हुई मौतों का हवाला देते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता और सरकारी लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हुई हैं और पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की हाट बाजार क्लीनिक जैसी योजनाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को नुकसान हुआ है।

स्वामी आत्मानंद स्कूलों का भी किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों का सिर्फ नाम ही नहीं बदला गया, बल्कि वहां फीस भी ली जाने लगी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की जनहितकारी योजनाओं को बंद करने से गरीब और ग्रामीण वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।