सीएम साय के प्रधान सचिव सुबोध सिंह एक्शन मोड में, कानून-व्यवस्था और जनशिकायतों पर सीधी नजर; बड़े प्रशासनिक फेरबदल के संकेत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और जवाबदेही को लेकर सरकार अब और सख्त नजर आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रधान सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कानून-व्यवस्था और जनशिकायतों की मॉनिटरिंग सीधे अपने हाथ में ले ली है। सूत्रों के मुताबिक, अब जिलों में कलेक्टर-एसपी से लेकर मंत्रालय के अधिकारियों तक की कार्यशैली का मूल्यांकन इन्हीं मानकों के आधार पर किया जाएगा। इसी बीच सुशासन तिहार से मिले फीडबैक के बाद राज्य के मैदानी अमले में बड़े पैमाने पर फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
परफॉरमेंस के आधार पर होगा मूल्यांकन
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सरकार अब प्रशासनिक मशीनरी की कार्यक्षमता को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। जनशिकायतों के निराकरण, कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिकारियों के प्रदर्शन का प्रमुख पैमाना बनाया जा रहा है। ऐसे में कई जिलों और विभागों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
संभागवार नोडल अधिकारियों की नई व्यवस्था
प्रधान सचिव सुबोध सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था में एक नई पहल करते हुए पहली बार संभागवार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये अधिकारी जिलों और संभागों में चल रहे विकास कार्यों की निगरानी करेंगे और सीधे प्रधान सचिव को रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
सचिवालय में भी हुआ बड़ा पुनर्गठन
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने सचिवालय स्तर पर भी विभागों के कामकाज का पुनर्गठन किया है। विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभारों में बदलाव कर समन्वय और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। हाल ही में सुबोध सिंह को सचिवालय के कार्यों में बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
ऊर्जा क्षेत्र की भी कमान
आईएएस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह को ऊर्जा विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनियों—CSPTCL, CSPGCL और CSPDCL—के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। सरकार का उद्देश्य बिजली व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
सुशासन तिहार के फीडबैक पर नजर
सरकारी सूत्रों का कहना है कि हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान जनता से मिले फीडबैक का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। जिन जिलों और विभागों के प्रदर्शन को लेकर शिकायतें या असंतोष सामने आया है, वहां प्रशासनिक बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
सरकार की प्राथमिकता फाइलों के तेजी से निपटारे, जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लिए जाने वाले फैसले प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को नई दिशा दे सकते हैं।





