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अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक समझौता, 14 सूत्रीय डील से खुलेगा होर्मुज मार्ग, तनाव कम होने की उम्मीद

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एवियन/तेहरान। वर्षों से चले आ रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते को पश्चिम एशिया में शांति, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के लागू होते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान से वर्चुअल माध्यम के जरिए समझौते पर हस्ताक्षर किए, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे स्थायी शांति की ओर बढ़ाया गया साहसिक और आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा, व्यापार को मिलेगी रफ्तार

समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोला जाएगा। इससे तेल और ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली बाधाएं कम होंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

सैन्य गतिविधियों पर लगेगा विराम

14 सूत्रीय समझौते के अनुसार दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमत हुए हैं। साथ ही अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ईरान को आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में मिलेगी ढील

समझौते में ईरान को बड़ी आर्थिक राहत देने का भी प्रावधान किया गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने, विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों की वापसी और आर्थिक विकास कार्यक्रमों में सहयोग जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के आर्थिक विकास से जुड़े बड़े निवेश कार्यक्रमों में भी सहयोग करेगा।

परमाणु कार्यक्रम पर बनी सहमति

परमाणु मुद्दे पर ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही उसके यूरेनियम भंडार और परमाणु गतिविधियों की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में की जाएगी।

वैश्विक बाजार की निगाहें समझौते पर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर देखने को मिलेगा। पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ने से वैश्विक व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।