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त्योहार पर संदेशः गोबर के बाद महिला समूह की बीजों से तैयार राखियों की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक अच्छा प्रयास किया जा रहा है। महिला समूहों द्वारा तैयार की जा रही राखियां हर वर्ग को एक संदेश दे रहा है। धर्म-आस्था से जुड़े भाई-बहन के पवित्र त्योहार पर राखियां स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है। राज्य में पिछले साल तक गोबर से तैयार की जाती थी, अब बीजों से आकर्षक बहुरंग राखियां तैयार की जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ में शासन से मिले प्रोत्साहन के बाद प्रदेश के की जिलों में महिला समूह ने बीते साल गोबर से राखियां बनाई थी। गोबर से बनी राखियों को मिली सराहना के बाद अब महिलाओं ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अनाज के बीजों से राखियां तैयार कर रही हैं, जो हाथों-हाथ बिक रही हैं। ये राखियां स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही हैं।

कांकेर जिले के ग्राम दसपुर में ये राखियां देखने को मिली। महामाया स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बीते साल गोबर व अन्य चीजों से राखियां तैयार की थी, जिसे आकर्षक बनाने के लिए पत्थर लगाया गया था, लेकिन इस बार तैयार की गई रखियों में पत्थर की बजाय अनाज का उपयोग किया गया है।

महामाया महिला समूह की महिलाओं ने इस वर्ष मटर, कुल्थी, मक्का, मसूर, धान, चावल, सीताफल एवं मयूर पंख सहित अन्य बीजों से आकर्षक राखियां तैयार की हैं। जब इन राखियों का उपयोग हो जाएगा तो खाद बना सकते हैं। वहीं बीजों से पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं का कहना है कि उनके द्वारा बनाई गई राखियों को बेचने के लिए कांकेर के सी-मार्ट सहित कलेक्ट्रेट परिसर में स्थान मिला है, इससे राखियां हाथों-हाथ बिक रही हैं।

महिलाओं ने बताया कि गत वर्ष बनाई गई राखियों से करीब 5 से 10 हजार रुपए तक का लाभ हुआ था, लेकिन इस वर्ष अभी तक 10 हजार रुपए से अधिक का लाभ हो चुका है। आज व कल में बिक्री से आय में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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