गुजरात में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2022 की हार से दोहरा झटका लगा है। कांग्रेस को इस बार न सिर्फ शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है, देश की सबसे पुरानी पार्टी के सिर पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद छिन जाने का खतरा भी मंडराने लगा है।
वैसे, यह कांग्रेस का गुजरात के इतिहास में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन भी है, जब वह 20 का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है। 182 विधानसभा सीटों वाले देश के पश्चिमी सूबे में कांग्रेस सिर्फ 16 सीटों पर जीत हासिल करती नजर आ रही है।
गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए किसी भी विपक्षी दल को सदन की कुल सदस्य संख्या की कम से कम 10 फीसदी सीटों पर जीतना जरूरी होता है, जो गुजरात के मामले में कम से कम 19 सीट बनेगा।
राहुल गांधी ने गुजरात हार पर किया ट्वीट
गुजरात विधानसभा में कांग्रेस की हार को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है उन्होंने गुजरात में मिली हार को लेकर ट्वीट किया, ‘हम गुजरात के लोगों का जनादेश विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। हम पुनर्गठन कर, कड़ी मेहनत करेंगे और देश के आदर्शों और प्रदेशवासियों के हक़ की लड़ाई जारी रखेंगे।’
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कांग्रेस को LoP की कुर्सी नहीं मिल पाई
ध्यान रहे, केंद्र में भी पिछले दो लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के कारण कांग्रेस को LoP, यानी नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी नहीं मिल पाई है। वर्ष 2014 में 543 सीटों वाली लोकसभा में कांग्रेस के खाते में केवल 44 सीटें आई थीं, और जब मल्लिकार्जुन खरगे के लिए नेता प्रतिपक्ष का पद मांगा गया था, तत्कालीन स्पीकर सुमित्रा महाजन ने नियमों का हवाला देते हुए इससे इंकार कर दिया था। इसके बाद, वर्ष 2019 में भी कांग्रेस केवल 52 सीटें ही जीत सकी थी, जबकि नेता प्रतिपक्ष के पद पाने के लिए लोकसभा में कम से कम 55 सीटों की जरूरत होती है।
खरगे ने नरेंद्र मोदी का बहिष्कार किया था
नेता प्रतिपक्ष कई संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के पैनल में शामिल होता है, जो अब नहीं होगा। नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में मल्लिकार्जुन खरगे को लोकपाल नियुक्ति के पैनल की बैठकों में विशेष आमंत्रित के रूप में बुलाया था, लेकिन नेता प्रतिपक्ष पद नहीं मिलने के विरोध में खरगे ने उसका बहिष्कार किया था।
LoP को मिलती है कई सुविधाएं
सदन में नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री के दर्जे की सुविधाएं मिलती हैं। अब गुजरात में कांग्रेस विधायक दल के नेता को ये सुविधाएं नहीं मिल सकेंगी। इन सब सुविधाओं के अलावा नेता प्रतिपक्ष के पद के पीछे एक बड़ा पॉलिटिकल मैसेज भी होता है। हालांकि ये कोई पहला ऐसा मौका नहीं है जब बीजेपी ऐसा कर रही हो इसके पहले कांग्रेस ने भी साल 1980 में और साल 1984 में ऐसा ही किया था उन्होंने किसी की दल के नेता को नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया था।
नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का रैंक सुविधाएं भी दी जाती
नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री का रैंक तथा उससे जुड़ी सुविधाएं भी दी जाती हैं, जो अब शायद कांग्रेस विधायक दल के नेता को नहीं मिल सकेंगी, अगर उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं दिया गया। इसके अलावा, नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा या संसद में सबसे आगे बैठने की जगह आवंटित की जाती है, और साथ ही संसद भवन, विधानसभाओं में कमरा तथा अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं।
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