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रेबड़ी बांटने के चक्कर में मध्यप्रदेश गले तक कर्ज में डूबा

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भोपाल। लोगों को रेवड़ी बांटने के चक्कर में मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार अब गले तक कर्ज में डूब गई है। बजट आकर से ज्यादा कर्ज की राशि हो गई है। सरकार ने मंगलवार को रिजर्व बैंक के मुम्बई कार्यालय के माध्यम से पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया।अब तक राज्य सरकार 3.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज ले चुकी है, जबकि मध्य प्रदेश का कुल बजट 3.65 लाख करोड़ रुपये है।



मध्य प्रदेश सरकार ने बाजार से पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज, 2500-2500 करोड़ के दो किस्तों में लिया है, पहली किश्त का कर्ज 11 साल में और दूसरी किश्त का कर्ज 19 साल में चुकाया जाएगा। इस साल 35 हजार 500 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। मंगलवार को लिए गए कर्ज को मिलाकर यह राशि 40 हजार 500 करोड़ रुपये हो जाएगी। राज्य सरकार इस साल 23 जनवरी को 2500 करोड़, फरवरी माह में 13 हजार करोड़, 26 मार्च को पांच हजार करोड़, अगस्त माह में 10 हजार करोड़ और 24 सितंबर को पांच हजार करोड़ इस तरह आठ बार कुल 35 हजार 500 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है।

कहते हैं मध्य प्रदेश पर फ्री बीज योजनाएं भारी पड़ रही हैं। आर्थिक मामलों के जानकार कहते हैं कि ‘कर्ज लेकर घी पीने की प्रवृत्ति’ घातक साबित हो सकती है। मध्य प्रदेश में सरकार यफ्री की रेवड़ी बांटकर लोगों को ‘घी’ पिला रही है। यही कारण है कि अब प्रदेश सरकार कर्ज की सीमा में गले तक डूब चुका है। लाडली बहना योजना के चलते सरकार की आर्थिक स्थिति ‘पंगु’ हो रही है।

विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लाडली बहना योजना शुरू की थी। वर्तमान में 1 करोड़ 29 लाख महिलाओं को हर महीने 1250 रुपए दिये जा रहे हैं। इस योजना पर हर साल 18 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यह राशि अकेले किसी विभाग के बजट से ज्यादा है।
सरकार प्रदेश के उन नागरिकों को 100 रुपए हर महीने बिजली दे रही है, जो हर महीने 100 यूनिट बिजली खपत करते हैं। जबकि प्रति यूनिट चार्ज 10 रुपये हैं, ऐसे में सरकार को भारी नुकसान हो रहा है। योजना पर 5500 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।कृषि पंपों पर सब्सिडी देने में 17 हजार करोड़ रुपए हर साल का खर्च आ रहा है। इसी तरह 450 रुपये में सिलेंडर देने पर एक हजार करोड़ रुपये हर साल व्यय हो रहा है। जानकारों का मानना है कि सरकार फ्री की रेवड़ी पर ही हर साल करीब 25 हजार रुपए खर्च कर रही है।