Close

डॉक्टर्स डे विशेष : गरियाबंद के मरीजो के मसीहा डॉक्टर हरीश चौहान

 

गरियाबंद। घर-घर पहुंचते ‘ भगवान ‘ गरियाबंद के मरीजो के मसीहा डॉक्टर हरीश चौहान । गरियाबंद ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है खासकर जब वहां पहुंचना मुश्किल हो । साधनों संसाधनों की कमी हो , उसके बावजूद अगर ऐसी जटिलताओं और मुश्किलों के बीच भी कोई डॉक्टर अगर अपने समर्पण और सेवा भाव से ग्रामीण क्षेत्र में अद्वितीय प्रभाव छोड़ने में सक्षम हो ऐसा शायद ही सुनने को मिलता है मगर गरियाबंद जिला अस्पताल में पदस्थ डाक्टर हरीश चौहान जिले की जनता के लिए किसी मसीहा से कम नही है । कहने को तो जिला अस्पताल की टाइमिंग सुबह 9 बजे से 1 बजे और 5 से 7 बजे तक रहती । मगर डॉक्टर हरीश चौहान मरीज के लिए 24 * 7 अवेलेबल रहते हैं डॉक्टर हरीश चौहान जिस समय जिला अस्पताल में मौजूद रहते हैं उसे समय मरिज सभी डॉक्टरों को छोड़ केवल उनसे ही अपना इलाज करना चाहते हैं डॉक्टर चौहान के प्रति मरीजों में कितना विश्वास है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि जब डॉक्टर चौहान जिला अस्पताल में नहीं रहते हैं और दूसरे डॉक्टर बैठे रहते हैं उसके बाद भी मरीज उन्हें अपनी तकलीफ और समस्या बताने नहीं जाते वे डॉक्टर चौहान का इंतजार करते हैं ।

डॉक्टर चौहान जिला अस्पताल के एक कमरे से उठकर अगर दूसरे कमरे के लिए भी जाते हैं तो उनके पीछे मरीजो की लाइन लगी रहती हैं और वह चलते-चलते भी सभी मरीजों को देखते रहते हैं डॉक्टर हरीश चौहान मूलतः शिवरीनारायण के रहने वाले है चार भाई दो बहनों में सबसे बड़े है । उनके अलावा उनके परिवार के 3 और सदस्य मेडिकल फील्ड से ही जुड़े है । मेडिकल कालेज की पढ़ाई पास करने बाद उनकी पहली पोस्टिंग पीएससी सलखन हुई । उसके बाद 2008 से 2012 तक वे गरियाबंद में रहे है 2012 से 2015 तक पीजी के लिए रायपुर मेडिकल कॉलेज गए । पीजी कंप्लीट करने के बाद 2015 से फिर वर्तमान तक गरियाबंद में ही है । डॉक्टर हरीश चौहान गरियाबंद के लोगो के लिए परिवार के बड़े सदस्य से कम नही है । डॉक्टर हरीश चौहान बताते हैं 2008 में जब उनकी पोस्टिंग गरियाबंद हुई थी तब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हुआ करता था उस वक्त लाइट की काफी समस्या थी उसके बावजूद भी वे काफी स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित नही होने देते थे ।

उस समय यहां मरचुरी नही हुआ करता था और गाँवो में कच्चे रास्ते हिने के चलते चार पहिया वाहन भी नही जा पाते थे ऐसे में अगर किसी की मौत हो जाती थी तो उसके दो से तीन दिन पुराने व को उसे जगह पर जाकर पोस्टमार्टम करना पड़ता था जो उनके लिए काफी बुरा अनुभव था । वर्तमान में तो हालात बदल गए हैं और पहले से ज्यादा सुविधाएं साधन संसाधन अब उपलब्ध हो चुके हैं । डॉक्टर चौहान दिनचर्या की बात करें तो सुबह 5:30 बजे उठ जाते हैं पहले अस्पताल में एक राउंड मारते हैं उसके बाद टहलने जाते हैं वहां से आकर फिर हॉस्पिटल का एक राउंड मारते हैं उसके बाद नहाकर 9:00 बजे से अस्पताल पहुंच जाते हैं कई बार तो दोपहर का खाना भी नसीब नहीं होता है लेकिन रात को समय निकालकर खा लेते हैं । चुकी उनका मकान अस्पताल के कंपाउंड में ही है इसलिए रात को लगभग हर एक-दो दिन की आड़ में पेशेंट इलाज कराने के लिए उनको उठाने आ जाते हैं । और डॉक्टर चौहान पूरी शिद्दत से उनका भी इलाज करते हैं उनके इसी समर्पण भाव को देखते हुए गरियाबंद की जनता उन्हें अपना मसीहा मानती है.

scroll to top