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वन्यजीवों और जैव विविधता के विभिन्न पहलुओं का विद्यार्थियों ने लिया व्यवहारिक ज्ञान

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० नंदनवन जंगल सफारी में बी.एससी. फॉरेस्ट्री छात्रों का सफल शैक्षणिक भ्रमण



रायपुर। दुर्ग जिले के सांकरा स्थित महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री के कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री एंड रिसर्च स्टेशन में बी.एससी. फॉरेस्ट्री तृतीय वर्ष में अध्ययनरत 33 विद्यार्थियों और 3 सहायक प्राध्यापकों ने राजधानी रायपुर के नंदनवन जंगल सफारी का सफल शैक्षणिक भ्रमण किया।

इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीव स्वास्थ्य प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों, और वन्यजीव अभ्यारण्यों के परिचालन दिशा-निर्देशों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

भ्रमण की शुरुआत में सुबह 10:40 बजे विद्यार्थियों के आगमन के साथ ही नंदनवन जंगल सफारी की शिक्षा टीम ने छात्रों का स्वागत किया और उन्हें जंगल सफारी के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों का अवलोकन कराया गया जिसमें जैव विविधता संरक्षण प्रयास के तहत छात्रों को नंदनवन जंगल सफारी द्वारा किए जा रहे विभिन्न संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी गई। इसमें वन्यजीवों के पुनर्वास, प्रजातियों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास शामिल थे।

वेटरनरी अस्पताल में विद्यार्थियों को वन्यजीवों के स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जानकारी देने के लिए वेटरनरी अस्पताल का भ्रमण कराया गया। यहां उन्हें जानवरों के उपचार, स्वास्थ्य प्रबंधन और पुनर्वास प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया। विद्यार्थियों ने ज़ू का दौरा किया, जिसमें उन्हें विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा, उन्होंने चार रोमांचक सफारी (शाकाहारी, भालू, बाघ और शेर सफारी) का भी अनुभव लिया, जहां उन्हें विभिन्न जीवों के प्राकृतिक आवास और व्यवहार के बारे में बताया गया।

जंगल सफारी के व्याख्या केंद्र में, नंदनवन जंगल सफारी की जू शिक्षा टीम ने छात्रों को सफारी की विशेषताओं और इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से समझाया। शैक्षणिक दौरे का समापन दोपहर 4:30 बजे हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने नंदनवन जंगल सफारी के संरक्षण प्रयासों की सराहना की और इस भ्रमण को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।

वन्यजीवों और जैव विविधता के विभिन्न पहलुओं का विद्यार्थियों ने लिया व्यवहारिक ज्ञान

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